Love Poetry (page 42)

क़ल्ब को बर्फ़-आश्ना न करो

हज़ीं लुधियानवी

फिर फ़ज़ा धुँदला गई आसार हैं तूफ़ान के

हज़ीं लुधियानवी

मिरे कलाम में पेचीदा इस्तिआ'रा नहीं

हज़ीं लुधियानवी

मवाद कर के फ़राहम चमकती सड़कों से

हज़ीं लुधियानवी

क्या गुल खिलाए देखिए तपती हुई हवा

हज़ीं लुधियानवी

इस तरह पैकर-ए-वफ़ा हो जाएँ

हज़ीं लुधियानवी

इस का नहीं है ग़म कोई, जाँ से अगर गुज़र गए

हज़ीं लुधियानवी

इस का नहीं है ग़म कोई जाँ से अगर गुज़र गए

हज़ीं लुधियानवी

दर्द के सीप में पैदा हुई बेदारी सी

हज़ीं लुधियानवी

आँसू को अपने दीदा-ए-तर से निकालना

हज़ीं लुधियानवी

महदूद-निगाही के सनम टूट रहे हैं

हयात वारसी

दास्तान-ए-फ़ितरत है ज़र्फ़ की कहानी है

हयात वारसी

दूसरों के वास्ते जीते रहे मरते रहे

हयात रिज़वी अमरोहवी

कारज़ार-ए-ज़िंदगी में ऐसे लम्हे आ गए

हयात रिज़वी अमरोहवी

पर-ए-जिब्रील भी जिस राह में जल जाते हैं

हयात मदरासी

हमारे शे'र का हासिल तअस्सुरात से है

हयात मदरासी

ये जज़्बा-ए-तलब तो मिरा मर न जाएगा

हयात लखनवी

वहम-ओ-गुमाँ में भी कहाँ ये इंक़िलाब था

हयात लखनवी

सूने सूने उजड़े उजड़े से घरों में ले चलो

हयात लखनवी

सिलसिला ख़्वाबों का सब यूँही धरा रह जाएगा

हयात लखनवी

मैं ख़ाल-ओ-ख़द का सरापा तसव्वुरात में था

हयात लखनवी

महक किरदार की आती रही है

हयात लखनवी

कई सितारे यहाँ टूटते बिखरते हैं

हयात लखनवी

कब क़ाबिल-ए-तक़लीद है किरदार हमारा

हयात लखनवी

निगाह-ए-शौक़ अगर दिल की तर्जुमाँ हो जाए

हया लखनवी

आह ये बरसात का मौसम ये ज़ख़्मों की बहार

हया लखनवी

शौक़ कहता है कि चलिए कू-ए-जानाँ की तरफ़

हया लखनवी

निगाह-ए-शौक़ अगर दिल की तर्जुमाँ हो जाए

हया लखनवी

न होती हाल-ए-दिल कहने की गर हिम्मत तो अच्छा था

हया लखनवी

चमन वही है घटाएँ वही बहार वही

हया लखनवी