Love Poetry (page 44)
जो मेहंदी का बुटना मला कीजिएगा
हातिम अली मेहर
ईज़ाएँ उठाए हुए दुख पाए हुए हैं
हातिम अली मेहर
इश्क़-ए-जान-ए-जहाँ नसीब हुआ
हातिम अली मेहर
इस दौर में हर इक तह-ए-चर्ख़-ए-कुहन लुटा
हातिम अली मेहर
हम से किनारा क्यूँ है तिरे मुब्तला हैं हम
हातिम अली मेहर
गुल-बाँग थी गुलों की हमारा तराना था
हातिम अली मेहर
ग़ैर हँसते हैं फ़क़त इस लिए टल जाता हूँ
हातिम अली मेहर
दोपहर रात आ चुकी हीला-बहाना हो चुका
हातिम अली मेहर
दिल ले गई वो ज़ुल्फ़-ए-रसा काम कर गई
हातिम अली मेहर
दीदा-ए-जौहर से बीना हो गया
हातिम अली मेहर
दरिया तूफ़ान बह रहा है
हातिम अली मेहर
छोड़ेंगे गरेबाँ का न इक तार कभी हम
हातिम अली मेहर
चैन पहलू में उसे सुब्ह नहीं शाम नहीं
हातिम अली मेहर
बुतों का ज़िक्र करो वाइज़ ख़ुदा को किस ने देखा है
हातिम अली मेहर
बुतों का ज़िक्र कर वाइ'ज़ ख़ुदा को किस ने देखा है
हातिम अली मेहर
बुतों का सामना है और मैं हूँ
हातिम अली मेहर
ब-ख़ुदा हैं तिरी हिन्दू बुत-ए-मय-ख़्वार आँखें
हातिम अली मेहर
अजब है 'मेहर' से उस शोख़ की विसाल का वक़्त
हातिम अली मेहर
ये तजरबा हुआ है मोहब्बत की राह में
हस्तीमल हस्ती
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
हस्तीमल हस्ती
खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो
हस्तीमल हस्ती
दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
हस्तीमल हस्ती
सिर्फ़ ख़यालों में न रहा कर
हस्तीमल हस्ती
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
हस्तीमल हस्ती
ख़्वाब में तेरा आना-जाना पहले भी था आज भी है
हस्तीमल हस्ती
इस बार मिले हैं ग़म कुछ और तरह से भी
हस्तीमल हस्ती
दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
हस्तीमल हस्ती
ढूँडा है हर जगह प कहीं पर नहीं मिला
हस्तीमल हस्ती
चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं
हस्तीमल हस्ती
ये ख़ाकी आग से हो कर यहाँ पे पहुँचा है
हस्सान अहमद आवान