Love Poetry (page 43)
सैंडिलों और झाड़ूओं से रोज़ मुझ को झाड़ना
हातिम भट्टी
हम को अब भी नहर पर जा कर नहाना याद है
हातिम भट्टी
वहदहू-ला-शरीक की है क़सम
हातिम अली मेहर
तू ने वहदत को कर दिया कसरत
हातिम अली मेहर
मजमा' में रक़ीबों के खुला था तिरा जूड़ा
हातिम अली मेहर
किधर का चाँद हुआ 'मेहर' के जो घर आए
हातिम अली मेहर
करते हैं शौक़-ए-दीद में बातें हवा से हम
हातिम अली मेहर
काफ़िर-ए-इश्क़ हूँ मुश्ताक़-ए-शहादत भी हूँ
हातिम अली मेहर
जवाँ रखती है मय देखे अजब तासीर पानी में
हातिम अली मेहर
हम 'मेहर' मोहब्बत से बहुत तंग हैं अब तो
हातिम अली मेहर
दीवाना हूँ पर काम में होशियार हूँ अपने
हातिम अली मेहर
ज़ुल्फ़ अंधेर करने वाली है
हातिम अली मेहर
ज़िक्र-ए-जानाँ कर जो तुझ से हो सके
हातिम अली मेहर
वो ज़ार हूँ कि सर पे गुलिस्ताँ उठा लिया
हातिम अली मेहर
वारिद कोह-ए-बयाबाँ जब में दीवाना हुआ
हातिम अली मेहर
उस ज़ुल्फ़ के सौदे का ख़लल जाए तो अच्छा
हातिम अली मेहर
उस का हाल-ए-कमर खुला हमदम
हातिम अली मेहर
साथ में अग़्यार के मैं भी सफ़-ए-मक़्तल में हूँ
हातिम अली मेहर
रंग-ए-सोहबत बदलते जाते हैं
हातिम अली मेहर
क़त्अ हो कर काकुल-ए-शब-गीर आधी रह गई
हातिम अली मेहर
पुतली की एवज़ हूँ बुत-ए-राना-ए-बनारस
हातिम अली मेहर
पूछेगा जो वो रश्क-ए-क़मर हाल हमारा
हातिम अली मेहर
पोशाक-ए-सियह में रुख़-ए-जानाँ नज़र आया
हातिम अली मेहर
न दिया बोसा-ए-लब खा के क़सम भूल गए
हातिम अली मेहर
मेरे ही दिल के सताने को ग़म आया सीधा
हातिम अली मेहर
कोई ले कर ख़बर नहीं आता
हातिम अली मेहर
खुल गया उन की मसीहाई का आलम शब-ए-वस्ल
हातिम अली मेहर
करते हैं शौक़-ए-दीद में बातें हवा से हम
हातिम अली मेहर
करें क्या हवस करें क्या हवस करें क्या हवस करें क्या हवस
हातिम अली मेहर
का'बा-ओ-बुत-ख़ाना वालों से जुदा बैठे हैं हम
हातिम अली मेहर