Love Poetry (page 41)
दिन रात तुम्हारी यादों से हम ज़ख़्म सँवारा करते हैं
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
दिल में इक शोर उठाते हैं चले जाते हैं
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
बहुत कठिन है डगर थोड़ी दूर साथ चलो
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
अपने कहते हैं कोई बात तो दुख होता है
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
रौशनी तेज़ करो चाँद सितारो अपनी
हीरा लाल फ़लक देहलवी
परतव-ए-हुस्न हूँ इस वास्ते महदूद हूँ मैं
हीरा लाल फ़लक देहलवी
पहुँचो गर इक चाँद पर सौ और आते हैं नज़र
हीरा लाल फ़लक देहलवी
नज़रों में हुस्न दिल में तुम्हारा ख़याल है
हीरा लाल फ़लक देहलवी
मिरा ख़त पढ़ लिया उस ने मगर ये तो बता क़ासिद
हीरा लाल फ़लक देहलवी
मैं तिरा जल्वा तू मेरा दिल है मेरे हम-नशीं
हीरा लाल फ़लक देहलवी
ज़माना देखता है हंस के चश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ मेरी
हीरा लाल फ़लक देहलवी
ये और बात है हर शख़्स के गुमाँ में नहीं
हीरा लाल फ़लक देहलवी
तारों से माहताब से और कहकशाँ से क्या
हीरा लाल फ़लक देहलवी
साक़िया ये जो तुझ को घेरे हैं
हीरा लाल फ़लक देहलवी
रौशन है फ़ज़ा शम्स कोई है न क़मर है
हीरा लाल फ़लक देहलवी
रंग-आमेज़ी से पैदा कुछ असर ऐसा हुआ
हीरा लाल फ़लक देहलवी
मेरी हस्ती में मिरी ज़ीस्त में शामिल होना
हीरा लाल फ़लक देहलवी
क्या कहें क्यूँकर हुआ तूफ़ान में पैदा क़फ़स
हीरा लाल फ़लक देहलवी
कू-ए-जानाँ में नहीं कोई गुज़र की सूरत
हीरा लाल फ़लक देहलवी
कू-ए-जानाँ में अदा देखिए दीवानों की
हीरा लाल फ़लक देहलवी
हो ख़ुदा का करम इरादों पर
हीरा लाल फ़लक देहलवी
दिल शादमाँ हो ख़ुल्द की भी आरज़ू न हो
हीरा लाल फ़लक देहलवी
अश्क-ए-ग़म वो है जो दुनिया को दिखा भी न सकूँ
हीरा लाल फ़लक देहलवी
आरास्ता बज़्म-ए-ऐश हुई अब रिंद पिएँगे खुल खुल के
हीरा लाल फ़लक देहलवी
आह-ए-ज़िंदाँ में जो की चर्ख़ पे आवाज़ गई
हीरा लाल फ़लक देहलवी
तुंदी-ए-सैल-ए-वक़्त में ये भी है कोई ज़िंदगी
हज़ीं लुधियानवी
नज़र न आई कभी फिर वो गाँव की गोरी
हज़ीं लुधियानवी
उतरने वाली दुखों की बरात से पहले
हज़ीं लुधियानवी
उम्र भर बहते हैं ग़म के तुंद-रौ धारों के साथ
हज़ीं लुधियानवी
सर-ता-ब-क़दम ख़ून का जब ग़ाज़ा लगा है
हज़ीं लुधियानवी