Love Poetry (page 39)
जवाब
हिमायत अली शाएर
हरीफ़-ए-विसाल
हिमायत अली शाएर
हारून की आवाज़
हिमायत अली शाएर
दूसरा तजरबा
हिमायत अली शाएर
बगूला
हिमायत अली शाएर
अन-कही
हिमायत अली शाएर
आईना-दर-आईना
हिमायत अली शाएर
ये शहर-ए-रफ़ीक़ाँ है दिल-ए-ज़ार सँभल के
हिमायत अली शाएर
ये बात तो नहीं है कि मैं कम स्वाद था
हिमायत अली शाएर
यम-ब-यम फैला हुआ है प्यास का सहरा यहाँ
हिमायत अली शाएर
तख़ातुब है तुझ से ख़याल और का है
हिमायत अली शाएर
रात सुनसान दश्त ओ दर ख़ामोश
हिमायत अली शाएर
नाला-ए-ग़म शो'ला-असर चाहिए
हिमायत अली शाएर
मेरा शुऊ'र मुझ को ये आज़ार दे गया
हिमायत अली शाएर
मंज़िल के ख़्वाब देखते हैं पाँव काट के
हिमायत अली शाएर
मैं सो रहा था और कोई बेदार मुझ में था
हिमायत अली शाएर
मैं जो कुछ सोचता हूँ अब तुम्हें भी सोचना होगा
हिमायत अली शाएर
क्या क्या न ज़िंदगी के फ़साने रक़म हुए
हिमायत अली शाएर
जो कुछ भी गुज़रता है मिरे दिल पे गुज़र जाए
हिमायत अली शाएर
इस शहर-ए-ख़ुफ़्तगाँ में कोई तो अज़ान दे
हिमायत अली शाएर
इस दश्त-ए-सुख़न में कोई क्या फूल खिलाए
हिमायत अली शाएर
इस दश्त पे एहसाँ न कर ऐ अब्र-ए-रवाँ और
हिमायत अली शाएर
चाँद ने आज जब इक नाम लिया आख़िर-ए-शब
हिमायत अली शाएर
बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है
हिमायत अली शाएर
अपना अंदाज़-ए-जुनूँ सब से जुदा रखता हूँ मैं
हिमायत अली शाएर
अब बताओ जाएगी ज़िंदगी कहाँ यारो
हिमायत अली शाएर
आए थे तेरे शहर में कितनी लगन से हम
हिमायत अली शाएर
पानी पे बनते अक्स की मानिंद हूँ मगर
हिलाल फ़रीद
जाम-ए-इश्क़ पी चुके ज़िंदगी भी जी चुके
हिलाल फ़रीद
इस अक़्ल की मारी नगरी में कभी पानी आग नहीं बनता
हिलाल फ़रीद