Love Poetry (page 40)
अपने दुख में रोना-धोना आप ही आया
हिलाल फ़रीद
ये विसाल ओ हिज्र का मसअला तो मिरी समझ में न आ सका
हिलाल फ़रीद
वक़्त ने रंग बहुत बदले क्या कुछ सैलाब नहीं आए
हिलाल फ़रीद
वही हुआ कि ख़ुद भी जिस का ख़ौफ़ था मुझे
हिलाल फ़रीद
थी अजब ही दास्ताँ जब तमाम हो गई
हिलाल फ़रीद
सब कुछ खो कर मौज उड़ाना इश्क़ में सीखा
हिलाल फ़रीद
मुमकिन ही नहीं कि किनारा भी करेगा
हिलाल फ़रीद
कभी तो सेहन-ए-अना से निकले कहीं पे दश्त-ए-मलाल आया
हिलाल फ़रीद
हम ख़ुद भी हुए नादिम जब हर्फ़-ए-दुआ निकला
हिलाल फ़रीद
आँसू तो कोई आँख में लाया नहीं हूँ मैं
हिलाल फ़रीद
आँखों में वो ख़्वाब नहीं बसते पहला सा वो हाल नहीं होता
हिलाल फ़रीद
न दर्द था न ख़लिश थी न तिलमिलाना था
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
अक्स से अपने वो यूँ कहते हैं आईने में
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
आया भी कोई दिल में गया भी कोई दिल से
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
वो ये कहते हैं ज़माने की तमन्ना मैं हूँ
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
वो शोख़ बाम पे जब बे-नक़ाब आएगा
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
तुम भी निगाह में हो अदू भी नज़र में है
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
शब-ए-फ़िराक़ कुछ ऐसा ख़याल-ए-यार रहा
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
मुझे फ़रेब-ए-वफ़ा दे के दम में लाना था
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
कुछ मोहब्बत में अजब शेव-ए-दिल-दार रहा
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
दिल फ़ुर्क़त-ए-हबीब में दीवाना हो गया
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
मैं अक्सर सोचती हूँ ज़िंदगी को कौन लिक्खेगा
हिजाब अब्बासी
दुआ ही वज्ह-ए-करामात थोड़ी होती है
हिजाब अब्बासी
ज़िंदगी से मिली सौग़ात ये तन्हाई की
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
तड़प के हाल सुनाया तो आँख भर आई
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
रास आई न मुझे अंजुमन-आराई भी
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
फिर अँधेरी राह में कोई दिया मिल जाएगा
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
मुझे तेरी जुदाई का ये सदमा मार डालेगा
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
मिरे शाने पे रहने दो अभी गेसू ज़रा ठहरो
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
दोस्तों से तो किनारा भी नहीं कर सकता
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी