Love Poetry (page 45)
तमाम तारों को जैसे क़मर से जोड़ा है
हस्सान अहमद आवान
सर-ए-दरबार ख़ामोशी तह-ए-दरबार ख़ुशियाँ हैं
हस्सान अहमद आवान
इश्क़ आज़ार कर दिया जाए
हस्सान अहमद आवान
दरिया की तरफ़ देख लो इक बार मिरे यार
हस्सान अहमद आवान
अश्क की ऐसी फ़रावानी पे रश्क आता है
हस्सान अहमद आवान
ऐसे कुछ लोग भी मिट्टी पे उतारे जाएँ
हस्सान अहमद आवान
रू-ए-ज़ेबा नज़र नहीं आता
हसरत शरवानी
ख़ुशा वो बाग़ महकती हो जिस में बू तेरी
हसरत शरवानी
वाक़िफ़ हैं ख़ूब आप के तर्ज़-ए-जफ़ा से हम
हसरत मोहानी
उन को याँ वादे पे आ लेने दे ऐ अब्र-ए-बहार
हसरत मोहानी
तासीर-ए-बर्क़-ए-हुस्न जो उन के सुख़न में थी
हसरत मोहानी
मिलते हैं इस अदा से कि गोया ख़फ़ा नहीं
हसरत मोहानी
कोशिशें हम ने कीं हज़ार मगर
हसरत मोहानी
कट गई एहतियात-ए-इश्क़ में उम्र
हसरत मोहानी
कहाँ हम कहाँ वस्ल-ए-जानाँ की 'हसरत'
हसरत मोहानी
जो और कुछ हो तिरी दीद के सिवा मंज़ूर
हसरत मोहानी
इक़रार है कि दिल से तुम्हें चाहते हैं हम
हसरत मोहानी
इल्तिफ़ात-ए-यार था इक ख़्वाब-ए-आग़ाज़-ए-वफ़ा
हसरत मोहानी
हक़ीक़त खुल गई 'हसरत' तिरे तर्क-ए-मोहब्बत की
हसरत मोहानी
है वहाँ शान-ए-तग़ाफ़ुल को जफ़ा से भी गुरेज़
हसरत मोहानी
देखने आए थे वो अपनी मोहब्बत का असर
हसरत मोहानी
छुप नहीं सकती छुपाने से मोहब्बत की नज़र
हसरत मोहानी
बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी
हसरत मोहानी
बाम पर आने लगे वो सामना होने लगा
हसरत मोहानी
अल्लाह-री जिस्म-ए-यार की ख़ूबी कि ख़ुद-ब-ख़ुद
हसरत मोहानी
ऐसे बिगड़े कि फिर जफ़ा भी न की
हसरत मोहानी
आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न
हसरत मोहानी
कृष्ण
हसरत मोहानी
यूँ तो आशिक़ तिरा ज़माना हुआ
हसरत मोहानी
याद कर वो दिन कि तेरा कोई सौदाई न था
हसरत मोहानी