Love Poetry (page 47)
कैसे छुपाऊँ राज़-ए-ग़म दीदा-ए-तर को क्या करूँ
हसरत मोहानी
जो वो नज़र बसर-ए-लुत्फ़ आम हो जाए
हसरत मोहानी
हुस्न-ए-बे-परवा को ख़ुद-बीन ओ ख़ुद-आरा कर दिया
हसरत मोहानी
हुस्न-ए-बे-मेहर को परवा-ए-तमन्ना क्या हो
हसरत मोहानी
हम ने किस दिन तिरे कूचे में गुज़ारा न किया
हसरत मोहानी
हर हाल में रहा जो तिरा आसरा मुझे
हसरत मोहानी
हमें वक़्फ़-ए-ग़म सर-ब-सर देख लेते
हसरत मोहानी
है मश्क़-ए-सुख़न जारी चक्की की मशक़्क़त भी
हसरत मोहानी
घटेगा तेरे कूचे में वक़ार आहिस्ता आहिस्ता
हसरत मोहानी
फ़ैज़-ए-मोहब्बत से है क़ैद-ए-मिहन
हसरत मोहानी
दुआ में ज़िक्र क्यूँ हो मुद्दआ का
हसरत मोहानी
दिल में क्या क्या हवस-ए-दीद बढ़ाई न गई
हसरत मोहानी
दिल को ख़याल-ए-यार ने मख़्मूर कर दिया
हसरत मोहानी
दीदनी हैं दिल-ए-ख़राब के रंग
हसरत मोहानी
देखना भी तो उन्हें दूर से देखा करना
हसरत मोहानी
दर्द-ए-दिल की उन्हें ख़बर न हुई
हसरत मोहानी
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हसरत मोहानी
छुप के उस ने जो ख़ुद-नुमाई की
हसरत मोहानी
चाहत मिरी चाहत ही नहीं आप के नज़दीक
हसरत मोहानी
बुत-ए-बे-दर्द का ग़म मोनिस-ए-हिज्राँ निकला
हसरत मोहानी
भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं
हसरत मोहानी
बदल-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार कहाँ से लाऊँ
हसरत मोहानी
बाम पर आने लगे वो सामना होने लगा
हसरत मोहानी
और तो पास मिरे हिज्र में क्या रक्खा है
हसरत मोहानी
और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत कर के
हसरत मोहानी
अक़्ल से हासिल हुई क्या क्या पशीमानी मुझे
हसरत मोहानी
अपना सा शौक़ औरों में लाएँ कहाँ से हम
हसरत मोहानी
आसान-ए-हक़ीकी है न कुछ सहल-ए-मजाज़ी
हसरत मोहानी
आप ने क़द्र कुछ न की दिल की
हसरत मोहानी
नज़र उस पर फ़िदा है जिस की ताबानी नहीं जाती
हसरत कमाली