Love Poetry (page 48)
ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी
हसरत जयपुरी
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते
हसरत जयपुरी
दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हसरत जयपुरी
ये कौन आ गई दिल-रुबा महकी महकी
हसरत जयपुरी
शो'ला ही सही आग लगाने के लिए आ
हसरत जयपुरी
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते
हसरत जयपुरी
हर्फ़-ए-इंकार कि इक़रार-ए-वफ़ा था क्या था
हसरत देवबंदी
ज़ाहिदा किस हुस्न-ए-गंदुम-गूँ पे है तेरी निगाह
हसरत अज़ीमाबादी
सौगंद है हसरत मुझे एजाज़-ए-सुख़न की
हसरत अज़ीमाबादी
रहे है नक़्श मेरे चश्म-ओ-दिल पर यूँ तिरी सूरत
हसरत अज़ीमाबादी
निभे थी आन उन्हों की हमेशा इश्क़ में ख़ूब
हसरत अज़ीमाबादी
ना-ख़लफ़ बस-कि उठी इश्क़ ओ जुनूँ की औलाद
हसरत अज़ीमाबादी
मोहब्बत एक तरह की निरी समाजत है
हसरत अज़ीमाबादी
काफ़िर-ए-इश्क़ हूँ ऐ शैख़ पे ज़िन्हार नहीं
हसरत अज़ीमाबादी
इश्क़ में ख़्वाब का ख़याल किसे
हसरत अज़ीमाबादी
इस जहाँ में सिफ़त-ए-इश्क़ से मौसूफ़ हैं हम
हसरत अज़ीमाबादी
हक़ अदा करना मोहब्बत का बहुत दुश्वार है
हसरत अज़ीमाबादी
बुरा न माने तो इक बात पूछता हूँ मैं
हसरत अज़ीमाबादी
भर के नज़र यार न देखा कभी
हसरत अज़ीमाबादी
यार इब्तिदा-ए-इश्क़ से बे-ज़ार ही रहा
हसरत अज़ीमाबादी
या इलाही मिरा दिलदार सलामत बाशद
हसरत अज़ीमाबादी
वफ़ा के हैं ख़्वान पर निवाले ज़े-आब अव्वल दोअम ब-आतिश
हसरत अज़ीमाबादी
उस ज़ुल्फ़ से दिल हो कर आज़ाद बहुत रोया
हसरत अज़ीमाबादी
सीना तो ढूँड लिया मुत्तसिल अपना हम ने
हसरत अज़ीमाबादी
साक़ी हैं रोज़-ए-नौ-बहार यक दो सह चार पंज ओ शश
हसरत अज़ीमाबादी
रखा पा जहाँ में नगारा ज़मीं पर
हसरत अज़ीमाबादी
राह-रस्ते में तू यूँ रहता है आ कर हम से मिल
हसरत अज़ीमाबादी
क़ासिद-ए-ख़ुश-फ़ाल लाया उस के आने की ख़बर
हसरत अज़ीमाबादी
फिरी सी देखता हूँ इस चमन की कुछ हवा बुलबुल
हसरत अज़ीमाबादी
न ग़रज़ नंग से रखते हैं न कुछ नाम से काम
हसरत अज़ीमाबादी