बारिश Poetry (page 4)
'इंशा'-जी है नाम उन्ही का चाहो तो तुम से मिलवाएँ
इब्न-ए-इंशा
दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो
इब्न-ए-इंशा
धूल-भरी आँधी में सब को चेहरा रौशन रखना है
हुसैन माजिद
साँस भर हवा
हुसैन आबिद
ज़ौक़-ए-तकल्लुम पर उर्दू ने राह अनोखी खोली है
हुरमतुल इकराम
अपने चमन पे अब्र ये कैसा बरस गया
हुरमतुल इकराम
दिल को दरून-ए-ख़्वाब का मौसम बोझल रखता है
हुमैरा रहमान
ये किस की याद की बारिश में भीगता है बदन
हुमैरा राहत
मैं आब-ए-इश्क़ में हल हो गई हूँ
हुमैरा राहत
हवा के साथ ये कैसा मोआमला हुआ है
हुमैरा राहत
बारिश के क़तरे के दुख से ना-वाक़िफ़ हो
हुमैरा राहत
लाएगा रंग ज़ब्त-ए-फ़ुग़ाँ देखते रहो
होश तिर्मिज़ी
इस दश्त पे एहसाँ न कर ऐ अब्र-ए-रवाँ और
हिमायत अली शाएर
दुआ ही वज्ह-ए-करामात थोड़ी होती है
हिजाब अब्बासी
दुआ ही वज्ह-ए-करामात थोड़ी होती है
हिजाब अब्बासी
अपने कहते हैं कोई बात तो दुख होता है
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
ज़माना देखता है हंस के चश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ मेरी
हीरा लाल फ़लक देहलवी
क्या गुल खिलाए देखिए तपती हुई हवा
हज़ीं लुधियानवी
इस तरह पैकर-ए-वफ़ा हो जाएँ
हज़ीं लुधियानवी
कारज़ार-ए-ज़िंदगी में ऐसे लम्हे आ गए
हयात रिज़वी अमरोहवी
आह ये बरसात का मौसम ये ज़ख़्मों की बहार
हया लखनवी
शौक़ कहता है कि चलिए कू-ए-जानाँ की तरफ़
हया लखनवी
करें क्या हवस करें क्या हवस करें क्या हवस करें क्या हवस
हातिम अली मेहर
बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी
हसरत मोहानी
है मश्क़-ए-सुख़न जारी चक्की की मशक़्क़त भी
हसरत मोहानी
वो मिरे शहर में आता है चला जाता है
हाशिम रज़ा जलालपुरी
ठहरे पानी को वही रेत पुरानी दे दे
हसन रिज़वी
साँझ-सवेरे फिरते हैं हम जाने किस वीराने में
हसन रिज़वी
पहले सी अब बात कहाँ है
हसन रिज़वी
चुप हैं हुज़ूर मुझ से कोई बात हो गई
हसन रिज़वी