बारिश Poetry (page 6)
दिल-लगी अपनी तिरे ज़िक्र से किस रात न थी
हैदर अली आतिश
दिल को इसी सबब से है इज़्तिराब शायद
हफ़ीज़ जौनपुरी
ज़ब्त-ए-गिर्या कभी करता हूँ तो फ़रमाते हैं
हफ़ीज़ जालंधरी
शाएर
हफ़ीज़ जालंधरी
इरशाद की याद में
हफ़ीज़ जालंधरी
अब ख़ूब हँसेगा दीवाना
हफ़ीज़ जालंधरी
ये मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती है
हफ़ीज़ जालंधरी
रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
हफ़ीज़ जालंधरी
ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा
हफ़ीज़ जालंधरी
इश्क़ में छेड़ हुई दीदा-ए-तर से पहले
हफ़ीज़ जालंधरी
इक बार फिर वतन में गया जा के आ गया
हफ़ीज़ जालंधरी
आने वाली बरखा देखें क्या दिखलाए आँखों को
हबीब जालिब
ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना
हबीब जालिब
जम्हूरियत
हबीब जालिब
बगिया लहूलुहान
हबीब जालिब
कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ
हबीब जालिब
कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए
हबीब जालिब
हम ने सुना था सहन-ए-चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं
हबीब जालिब
हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले
हबीब जालिब
दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे-कार लुटाते हो
हबीब जालिब
बढ़ा दी इक नज़र में तू ने क्या तौक़ीर पत्थर की
हबीब मूसवी
जिस को देखो शाम-सवेरे बे-कल है
हबीब कैफ़ी
बे-नियाज़ी से मुदारात से डर लगता है
हबीब अशअर देहलवी
फिरता हूँ मैं घाटी घाटी सहरा सहरा तन्हा तन्हा
ग्यान चन्द
ज़ाहिर मुसाफ़िरों का हुनर हो नहीं रहा
गुलज़ार बुख़ारी
उस का चेहरा भी चमक में न मिसाली निकला
गुलज़ार बुख़ारी
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को
गुलज़ार
नज़्म
गुलज़ार
बारिश होती है तो पानी को भी लग जाते हैं पाँव
गुलज़ार
हवा के सींग न पकड़ो खदेड़ देती है
गुलज़ार