दिल Poetry (page 254)

जिस दिन से कोई ख़्वाहिश-ए-दुनिया नहीं रखता

फ़राग़ रोहवी

दिन में भी हसरत-ए-महताब लिए फिरते हैं

फ़राग़ रोहवी

फटी मश्कें लिए दिन-रात दरिया देखने वाले

फ़क़ीह हैदर

यूँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया

फ़ानी बदायुनी

यूँ न किसी तरह कटी जब मिरी ज़िंदगी की रात

फ़ानी बदायुनी

यारब नवा-ए-दिल से ये कान आश्ना से हैं

फ़ानी बदायुनी

या तिरे मुहताज हैं ऐ ख़ून-ए-दिल

फ़ानी बदायुनी

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में

फ़ानी बदायुनी

रोज़-ए-जज़ा गिला तो क्या शुक्र-ए-सितम ही बन पड़ा

फ़ानी बदायुनी

रोज़ है दर्द-ए-मोहब्बत का निराला अंदाज़

फ़ानी बदायुनी

मुस्कुराए वो हाल-ए-दिल सुन कर

फ़ानी बदायुनी

मेरी हवस को ऐश-ए-दो-आलम भी था क़ुबूल

फ़ानी बदायुनी

जल्वा ओ दिल में फ़र्क़ नहीं जल्वे को ही अब दिल कहते हैं

फ़ानी बदायुनी

हिज्र में मुस्कुराए जा दिल में उसे तलाश कर

फ़ानी बदायुनी

दिल सरापा दर्द था वो इब्तिदा-ए-इश्क़ थी

फ़ानी बदायुनी

दर्द-ए-दिल की उन्हें ख़बर क्या हो

फ़ानी बदायुनी

बहला न दिल न तीरगी-ए-शाम-ए-ग़म गई

फ़ानी बदायुनी

आँख उठाई ही थी कि खाई चोट

फ़ानी बदायुनी

आबादी भी देखी है वीराने भी देखे हैं

फ़ानी बदायुनी

ज़ीस्त का हासिल बनाया दिल जो गोया कुछ न था

फ़ानी बदायुनी

ज़बाँ मुद्दआ-आश्ना चाहता हूँ

फ़ानी बदायुनी

यूँ नज़्म-ए-जहाँ दरहम-ओ-बरहम न हुआ था

फ़ानी बदायुनी

ये किस क़यामत की बेकसी है ज़मीं ही अपना न यार मेरा

फ़ानी बदायुनी

याँ होश से बे-ज़ार हुआ भी नहीं जाता

फ़ानी बदायुनी

वो पूछते हैं हिज्र में है इज़्तिराब क्या

फ़ानी बदायुनी

वो मश्क़-ए-ख़ू-ए-तग़ाफ़ुल फिर एक बार रहे

फ़ानी बदायुनी

वो कहते हैं कि है टूटे हुए दिल पर करम मेरा

फ़ानी बदायुनी

वो जी गया जो इश्क़ में जी से गुज़र गया

फ़ानी बदायुनी

वादी-ए-शौक़ में वारफ़्ता-ए-रफ़्तार हैं हम

फ़ानी बदायुनी

तिरी तिरछी नज़र का तीर है मुश्किल से निकलेगा

फ़ानी बदायुनी

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