दिल Poetry (page 290)

न आने के उन के बहाने भी देखे

बशीर महताब

माना उस को गिला नहीं मुझ से

बशीर महताब

जब से मिरे रक़ीब का रस्ता बदल गया

बशीर महताब

हम हथेली पे जान रखते हैं

बशीर महताब

इक लम्हा भी गुज़ारूँ भला क्यूँ किसी के साथ

बशीर महताब

चले जाना मगर सुन लो मिरे दिल में ये हसरत है

बशीर महताब

मैं जितनी देर तिरी याद में उदास रहा

बशीर फ़ारूक़ी

लोगो हम छान चुके जा के समुंदर सारे

बशीर फ़ारूक़ी

अब के जुनूँ में लज़्ज़त-ए-आज़ार भी नहीं

बशीर फ़ारूक़ी

वो सितम-परवर ब-चश्म अश्क-बार आ ही गया

बशीर फ़ारूक़

सबा गुल-ए-रेज़ जाँ-परवर फ़ज़ा है

बशीर फ़ारूक़

वो शख़्स जिस को दिल ओ जाँ से बढ़ के चाहा था

बशीर बद्र

रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा

बशीर बद्र

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

बशीर बद्र

न जाने कब तिरे दिल पर नई सी दस्तक हो

बशीर बद्र

मुझे लगता है दिल खिंच कर चला आता है हाथों पर

बशीर बद्र

मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना

बशीर बद्र

कमरे वीराँ आँगन ख़ाली फिर ये कैसी आवाज़ें

बशीर बद्र

हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ सा

बशीर बद्र

हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं

बशीर बद्र

बहुत दिनों से है दिल अपना ख़ाली ख़ाली सा

बशीर बद्र

अहबाब भी ग़ैरों की अदा सीख गए हैं

बशीर बद्र

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा

बशीर बद्र

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा

बशीर बद्र

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

बशीर बद्र

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

बशीर बद्र

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है

बशीर बद्र

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

बशीर बद्र

उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है

बशीर बद्र

तारों भरी पलकों की बरसाई हुई ग़ज़लें

बशीर बद्र

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