Ghazal Poetry (page 23)
मैं रतजगों के मुकम्मल अज़ाब देखूँगा
ज़मान कंजाही
ख़ुद अपनी सोच के पंछी न अपने बस में रहे
ज़मान कंजाही
ज़िंदगी यूँ भी कभी मुझ को सज़ा देती है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
ज़िंदगानी की हक़ीक़त तब ही खुलती है मियाँ
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
ज़मीन-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा पे उड़ती हिकायतें भी नई नहीं हैं
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
उस ने निगाह-ए-लुत्फ़-ओ-करम बार बार की
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
उरूज उस के लिए था ज़वाल मेरे लिए
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
उम्र गुज़री है कामरानी से
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
तुम क्या साहब और तुम्हारी बात है क्या
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
सुकूत-ए-शब में दिल-ए-दाग़-दाग़ रौशन है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
सभी को ख़्वाहिश-ए-तस्ख़ीर-ए-शौक़-ए-हुक्मरानी है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
रात का हुस्न भला कब वो समझता होगा
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
पुर-नूर ख़यालों की बरसात तिरी बातें
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
पेट की आग में बरबाद जवानी कर के
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
पलकों पे तैरते हुए महशर तमाम-शुद
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
मुद्दत हुई न मुझ से मिरा राब्ता हुआ
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
लबों की जुम्बिश नवा-ए-बुलबुल है शोख़ लहजा तिरा क़यामत
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
क्या बताएँ ग़म-ए-फ़ुर्क़त में कहाँ से गुज़रे
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
ख़्वाब-नगर के शहज़ादे ने ऐसे भी निरवान लिया
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
ख़याल-ओ-ख़्वाब में डूबी दीवार-ओ-दर बनाती हैं
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
ख़ाक सहराओं की पलकों पे सजा ली हम ने
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
कभी अज़ाबों में बस रही है कभी ये ख़्वाबों में कट रही है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
जिस्म ताज़ा गुलाब की सूरत
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
इस बज़्म-ए-तसव्वुर में बस यार की बातें हैं
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
हिज्र का ये कर्ब सारा बे-असर हो जाएगा
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
हसीं यादें सुनहरे ख़्वाब पीछे छोड़ आए हैं
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
हैं गर्दिशें भी रवाँ बख़्त के सितारे में
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
हाइल दिलों की राह में कुछ तो अना भी है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
ग़ज़ल के शानों पे ख़्वाब-ए-हस्ती ब-चश्म-ए-पुर-नम ठहर गए हैं
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
फ़िक्र में डूबे थे सब और बा-हुनर कोई न था
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर