Ghazal Poetry (page 429)
हासिल-ए-इश्क़ तिरा हुस्न-ए-पशीमाँ ही सही
नासिर काज़मी
गिरफ़्ता-दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने
नासिर काज़मी
ग़म-फ़ुर्सती-ए-ख़्वाब-ए-तरब याद रहेगी
नासिर काज़मी
ग़म है या ख़ुशी है तू
नासिर काज़मी
गली गली मिरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल
नासिर काज़मी
गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग
नासिर काज़मी
गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो
नासिर काज़मी
फ़िक्र-ए-तामीर-ए-आशियाँ भी है
नासिर काज़मी
दुख की लहर ने छेड़ा होगा
नासिर काज़मी
दिन का फूल अभी जागा था
नासिर काज़मी
दिन ढला रात फिर आ गई सो रहो सो रहो
नासिर काज़मी
दिल में इक लहर सी उठी है अभी
नासिर काज़मी
दिल में और तो क्या रक्खा है
नासिर काज़मी
दिल धड़कने का सबब याद आया
नासिर काज़मी
धूप थी और बादल छाया था
नासिर काज़मी
धूप निकली दिन सुहाने हो गए
नासिर काज़मी
दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया
नासिर काज़मी
दौर-ए-फ़लक जब दोहराता है मौसम-ए-गुल की रातों को
नासिर काज़मी
दफ़अ'तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई
नासिर काज़मी
अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को
नासिर काज़मी
अपनी धुन में रहता हूँ
नासिर काज़मी
आराइश-ए-ख़याल भी हो दिल-कुशा भी हो
नासिर काज़मी
आज तो बे-सबब उदास है जी
नासिर काज़मी
ज़ख़्म-ए-दिल को तसल्लियाँ दे दो
नासिर जौनपुरी
न काम आई मिरे कुछ मिरी शराफ़त भी
नासिर चौधरी
मिलता है मौज मौज मुझे तू कभी कभी
नासिर चौधरी
वाइज़-ए-तुंद-ख़ू को दे बादा-ओ-जाम साक़िया
नासिर बशीर
फ़क़ीह-ए-शहर का लहजा है पुर-जलाल बहुत
नासिर बशीर
शब कुछ ऐसे चली पवन ख़ाली
नासिर बलूच
बे-यक़ीनी का हर इक सम्त असर जागता है
नासिर अक़ील