Ghazal Poetry (page 427)

चेहरे पे कोई रंग शिकायत का नहीं था

नासिर राव

आँख में आँसू नहीं शबनम नहीं कुछ ग़म नहीं

नासिर राव

ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा

नासिर काज़मी

यूँ तिरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए

नासिर काज़मी

ये सितम और कि हम फूल कहें ख़ारों को

नासिर काज़मी

ये शब ये ख़याल-ओ-ख़्वाब तेरे

नासिर काज़मी

ये रात तुम्हारी है चमकते रहो तारो

नासिर काज़मी

ये भी क्या शाम-ए-मुलाक़ात आई

नासिर काज़मी

याद आता है रोज़ ओ शब कोई

नासिर काज़मी

वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए

नासिर काज़मी

वो दिल-नवाज़ है लेकिन नज़र-शनास नहीं

नासिर काज़मी

तुझ बिन घर कितना सूना था

नासिर काज़मी

तू जब मेरे घर आया था

नासिर काज़मी

तू है या तेरा साया है

नासिर काज़मी

तू असीर-ए-बज़्म है हम-सुख़न तुझे ज़ौक़-ए-नाला-ए-नय नहीं

नासिर काज़मी

थोड़ी देर को जी बहला था

नासिर काज़मी

तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई

नासिर काज़मी

तिरे मिलने को बेकल हो गए हैं

नासिर काज़मी

तिरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई

नासिर काज़मी

तिरे आने का धोका सा रहा है

नासिर काज़मी

तन्हाई का दुख गहरा था

नासिर काज़मी

सुनाता है कोई भोली कहानी

नासिर काज़मी

शहर सुनसान है किधर जाएँ

नासिर काज़मी

शबनम-आलूद पलक याद आई

नासिर काज़मी

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा

नासिर काज़मी

सफ़र-ए-मंज़िल-ए-शब याद नहीं

नासिर काज़मी

रोते रोते कौन हँसा था

नासिर काज़मी

रह-नवर्द-ए-बयाबान-ए-ग़म सब्र कर सब्र कर

नासिर काज़मी

रह-ए-जुनूँ में ख़ुदा का हवाला क्या करता

नासिर काज़मी

क़फ़स को चमन से सिवा जानते हैं

नासिर काज़मी