Ghazal Poetry (page 426)

हसरत-ए-अहद-ए-वफ़ा बाक़ी है

नासिर शहज़ाद

हसरत-ए-अहद-ए-वफ़ा बाक़ी है

नासिर शहज़ाद

घर वाले भी सोए हैं अभी शब भी घनी है

नासिर शहज़ाद

इक अक्स दिल के तट से बे-इख़्तियार फूटे

नासिर शहज़ाद

दो एक साल ही इक से सराही जाती है

नासिर शहज़ाद

दिल से हुसूल-ए-ज़र के सभी ज़ोम हट गए

नासिर शहज़ाद

दिल पे थी सब्त जो तहरीर मिटाई न गई

नासिर शहज़ाद

दिल मिटे प्यार की अपीलों पर

नासिर शहज़ाद

दिल को जब आगही की आग लगे

नासिर शहज़ाद

धुन नहीं कोई मुद्दआ' कैसा

नासिर शहज़ाद

धरती पे ज़िंदगी के अमिट ए'तिमाद को

नासिर शहज़ाद

छत्तीस साल का भी सन्यास छीन कर

नासिर शहज़ाद

बेकल है मुख निगाह में बोसों की प्यास है

नासिर शहज़ाद

बदन सुंदर सजल मुख पर सिंंहापा

नासिर शहज़ाद

और सफ़र लम्बा हुआ हर गाम पर

नासिर शहज़ाद

और अंत में जुदाई बड़ी कर्ब-नाक है

नासिर शहज़ाद

अब्र नारियल नद्दी रास्ते पे मैं और तू

नासिर शहज़ाद

आँखों के आबगीने बहे फूट फूट कर

नासिर शहज़ाद

ज़हर तो ला-जवाब था उस का

नासिर राव

उस पर तो कभी दिल का कोई ज़ोर नहीं था

नासिर राव

तन्हाइयों की गोद में पल कर बड़ा हुआ

नासिर राव

सर पे सूरज खड़ा है चल उठ जा

नासिर राव

संजीदा तबीअ'त की कहानी नहीं समझे

नासिर राव

कुछ ज़ियादा वबाल कर डाला

नासिर राव

कहीं अज़ाब कहीं पर सवाब लिखते हैं

नासिर राव

कहाँ और कब कब अकेला रहा हूँ

नासिर राव

जो घाव तुम ने दिया था वो घाव ज़िंदा है

नासिर राव

जब उजाला गली से गुज़रने लगा

नासिर राव

हमारे हक़ में दुआ करेगा

नासिर राव

एक दो रात में शोहरत नहीं मिलती पगले

नासिर राव