Ghazal Poetry (page 431)
आख़िरी गाड़ी गुज़रने की सदा भी आ गई
नश्तर ख़ानक़ाही
आगे पहुँचा जल का धारा बजरा पीछे छूट गया
नश्तर ख़ानक़ाही
यूँ ठनी रात तिरी याद से तकरार-ए-ख़याल
नासीरुद्दीन
सरहद-ए-आवाज़ दिल का दूर से पत्थर न देख
नासीरुद्दीन
वो हम-सफ़र था मगर उस से हम-नवाई न थी
नसीर तुराबी
तुझे क्या ख़बर मिरे बे-ख़बर मिरा सिलसिला कोई और है
नसीर तुराबी
सुकूत-ए-शाम से घबरा न जाए आख़िर तू
नसीर तुराबी
सबा का नर्म सा झोंका भी ताज़ियाना हुआ
नसीर तुराबी
सबा का नर्म सा झोंका भी ताज़ियाना हुआ
नसीर तुराबी
रचे-बसे हुए लम्हों से जब हिसाब हुआ
नसीर तुराबी
मिस्ल-ए-सहरा है रिफ़ाक़त का चमन भी अब के
नसीर तुराबी
मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता
नसीर तुराबी
मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता
नसीर तुराबी
मरहम-ए-वक़्त न एजाज़-ए-मसीहाई है
नसीर तुराबी
मैं भी ऐ काश कभी मौज-ए-सबा हो जाऊँ
नसीर तुराबी
कोई आवाज़ न आहट न ख़याल ऐसे में
नसीर तुराबी
इस कड़ी धूप में साया कर के
नसीर तुराबी
इंजील-ए-रफ़्तगाँ की हदीसों के साथ हूँ
नसीर तुराबी
हम-रही की बात मत कर इम्तिहाँ हो जाएगा
नसीर तुराबी
दिया सा दिल के ख़राबे में जल रहा है मियाँ
नसीर तुराबी
देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते
नसीर तुराबी
दर्द की धूप से चेहरे को निखर जाना था
नसीर तुराबी
ज़िंदगी को ना-मुरादी से कोई शिकवा नहीं
नसीर प्रवाज़
समझ के फ़र्ज़ कभी दिन को रात मत करना
नसीर प्रवाज़
हसीं दिमाग़ मिले जागता शुऊर मिले
नसीर प्रवाज़
उन से मायूस-ए-इल्तिफ़ात नहीं
नसीर आरज़ू
जिगर में दर्द तो है दिल में इज़्तिराब तो है
नसीर आरज़ू
इतना मानूस है दिल आप के अफ़्साने से
नसीर आरज़ू
ताक़-ए-माज़ी में जो रक्खे थे सजा कर चेहरे
नसीर अहमद नासिर
सितारा शाम से निकला हुआ है
नसीर अहमद नासिर