Ghazal Poetry (page 433)

कब इस ज़मीं पे मुझे आर्मीदा होना था

नसीम देहलवी

फ़स्ल-ए-गुल आई है कल और ही सामाँ होंगे

नसीम देहलवी

देख ओ क़ातिल बसर करते हैं किस मुश्किल से हम

नसीम देहलवी

ज़िक्र-ए-ईफ़ा कुछ नहीं वादा ही वादा हम से है

नसीम भरतपूरी

ज़िक्र-ए-दुश्मन है नागवार किसे

नसीम भरतपूरी

यूँही गर अदू की ग़ुलामी करेंगे

नसीम भरतपूरी

उन के पैकान पे पैकान चले आते हैं

नसीम भरतपूरी

सीधा सच्चा तुम्हें ऐ जान-ए-जहाँ जाने कौन

नसीम भरतपूरी

शब-ए-फ़ुर्क़त क़ज़ा नहीं आती

नसीम भरतपूरी

सब लुत्फ़ है ख़ाक-ए-ज़िंदगी का

नसीम भरतपूरी

रखना ख़म-ए-गेसू में या दिल को रिहा करना

नसीम भरतपूरी

नाला-ए-दिल कमाल का निकला

नसीम भरतपूरी

न मानी उस ने एक भी दिल की

नसीम भरतपूरी

मेरे तड़पने ने तमाशा किया

नसीम भरतपूरी

क्या ख़ाक कहूँ मतलब-ए-दिलदार के आगे

नसीम भरतपूरी

जो पूछा सब्र-ए-हिज्र-ए-ग़ैर में क्या हो नहीं सकता

नसीम भरतपूरी

जिधर देख तुम्हारी बज़्म में अग़्यार बैठे हैं

नसीम भरतपूरी

जौर-ए-पैहम की इंतिहा भी है

नसीम भरतपूरी

जहाँ में अभी यूँ तो क्या क्या न होगा

नसीम भरतपूरी

जब किसी को ख़फ़ा करे कोई

नसीम भरतपूरी

हम यार की ग़ैरों पे नज़र देख रहे हैं

नसीम भरतपूरी

होंगे दिल-ओ-जिगर में निशाँ देख लीजिए

नसीम भरतपूरी

हिज्र में जब ख़याल-ए-यार आया

नसीम भरतपूरी

ग़ैर के घर हैं वो मेहमान बड़ी मुश्किल है

नसीम भरतपूरी

ग़ैर के घर बन के डाली जाएगी

नसीम भरतपूरी

दिखाए मोजज़े गर वो बुत-ए-अय्यार चुटकी में

नसीम भरतपूरी

दे दें अभी करे जो कोई ख़ूब-रू पसंद

नसीम भरतपूरी

बेताब हैं किसी की निगाहें नक़ाब में

नसीम भरतपूरी

बहार आई है फिर वहशत के सामाँ होते जाते हैं

नसीम भरतपूरी

आप वो सब की जान लेते हैं

नसीम भरतपूरी