Ghazal Poetry (page 435)

कहीं गिरफ़्त नहीं कोई इस्तिआरा नहीं

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

इम्तिहाँ लेने चला है मिरी बीनाई का

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

ग़ुबार-ए-शब ज़रा इस अम्र की ख़बर करना

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

इक हाथ दुआओं का असर काट रहा है

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

अपने पिंदार से घट कर नहीं क़ाएम रहता

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

तिरा तज़्किरा सू-ब-सू क्यूँ करें हम

नरेश कुमार शाद

शाम-ए-वादा का ढल गया साया

नरेश कुमार शाद

रौनक़ बढ़ेगी रू-ए-नशात-ए-जमाल की

नरेश कुमार शाद

फिर इस दुनिया से उम्मीद-ए-वफ़ा है

नरेश कुमार शाद

नारवा है किसी की हमराही

नरेश कुमार शाद

कौन सुलगते आँसू रोके आग के टुकड़े कौन चबाए

नरेश कुमार शाद

हयात है कि मुसलसल सफ़र का आलम है

नरेश कुमार शाद

एक धोका है ये शब-रंग सवेरा क्या है

नरेश कुमार शाद

डूब कर पार उतर गए हैं हम

नरेश कुमार शाद

बिजलियों की हँसी उड़ाने को

नरेश कुमार शाद

बद-गुमाँ मुझ से न ऐ फ़स्ल-ए-बहाराँ होना

नरेश कुमार शाद

उम्मीद-वार-ए-लुत्फ़ नहीं हैं किसी से हम

नरेश कुमार दर्द

ज़हर देता है कोई कोई दवा देता है

नक़्श लायलपुरी

वो आएगा दिल से दुआ तो करो

नक़्श लायलपुरी

तुझ को सोचा तो खो गईं आँखें

नक़्श लायलपुरी

तमाम-उम्र चला हूँ मगर चला न गया

नक़्श लायलपुरी

पलट कर देख लेना जब सदा दिल की सुनाई दे

नक़्श लायलपुरी

माना तिरी नज़र में तिरा प्यार हम नहीं

नक़्श लायलपुरी

मैं दुनिया की हक़ीक़त जानता हूँ

नक़्श लायलपुरी

कोई झंकार है नग़्मा है सदा है क्या है

नक़्श लायलपुरी

जब दर्द मोहब्बत का मिरे पास नहीं था

नक़्श लायलपुरी

एक आँसू गिरा सोचते सोचते

नक़्श लायलपुरी

अपनी भीगी हुई पलकों पे सजा लो मुझ को

नक़्श लायलपुरी

अपना दामन देख कर घबरा गए

नक़्श लायलपुरी

हर नई शाम ये एहसास हुआ हो गोया

नक़्क़ाश काज़मी