Ghazal Poetry (page 434)

मिरे लबों पे आते आते कोई बात थक गई

नसीम अंसारी

मेरे कहने से तो दिल उन पर मिरा आया न था

नसीम अंसारी

वहीं पे सच का मुझे तर्जुमान होना था

नसीम अहमद नसीम

सबब तो कुछ भी नहीं और उदास रहता है

नसीम अहमद नसीम

पढ़ के लिख के हालत क्या हम ने ये बना ली है

नसीम अहमद नसीम

न जाने कौन सा रिश्ता है मुझ से नाता है

नसीम अहमद नसीम

मिरी औक़ात वो इस तरह बता देता है

नसीम अहमद नसीम

कर्ब आँखों से अयाँ दिल में कसक बाक़ी है

नसीम अहमद नसीम

कहने को पुर-सुकून मगर मख़मसे में हूँ

नसीम अहमद नसीम

हर घड़ी एक ही जैसा कभी सोचा न करो

नसीम अहमद नसीम

ये बस्ती प्यार की ने'मत से ख़ाली होती जाती है

नसीम अब्बासी

वो मेरे ज़ेहन पे इतना सवार हो गया था

नसीम अब्बासी

तमाम उम्र मयस्सर बस एक ख़ाना हवा

नसीम अब्बासी

मेरा तन सर से जुदा करते ही बेकल हो गया

नसीम अब्बासी

में ऐसा ज़ौक़-ए-ज़ेबाइश ब-रू-ए-कार ले आया

नसीम अब्बासी

किस बुर्ज में फ़लक ने सितारे मिलाए हैं

नसीम अब्बासी

ख़मोश रह कर पुकारती है

नसीम अब्बासी

कह गया था वो कुछ इशारे से

नसीम अब्बासी

जिस वक़्त उस ने बख़्त हमारे बनाए थे

नसीम अब्बासी

जहाँ जहाँ भी हवस का ये जानवर जाए

नसीम अब्बासी

जहाँ जहाँ भी हवस का ये जानवर जाए

नसीम अब्बासी

इतना न घूम रात को फूलों की बास में

नसीम अब्बासी

इतना न घूम रात को फूलों की बास में

नसीम अब्बासी

दोस्त बन कर भी कहीं घात लगा सकती है

नसीम अब्बासी

छोटे बड़े बुरे भले दिन रात के लिए

नसीम अब्बासी

बदन का काम थोड़ा है मगर मोहलत ज़ियादा है

नसीम अब्बासी

तिरे ख़याल, तिरे ख़्वाब, तेरे नाम के साथ

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

सूरत-ए-हाल-ए-दिल बदलता है

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

रक़्स-ए-ज़मीं को गर्दिश-ए-अफ़्लाक चाहिए

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी

नमी थी आँख में लेकिन इक ए'तिमाद भी था

नरजिस अफ़रोज़ ज़ैदी