Ghazal Poetry (page 432)
शब की पहनाइयों में चीख़ उठे
नसीर अहमद नासिर
ख़ला के दरमियानी मौसमों में
नसीर अहमद नासिर
दर्द के पीले गुलाबों की थकन बाक़ी रही
नसीर अहमद नासिर
अक्स टूटा है बारहा मेरा
नसीर अहमद नासिर
तन्हाई के लम्हात का एहसास हुआ है
नसीम शाहजहाँपुरी
क़ल्ब-ए-वारफ़्ता मोहब्बत में कहीं ऐसा न हो
नसीम शाहजहाँपुरी
न अरमाँ ले के आया हूँ न हसरत ले के आया हूँ
नसीम शाहजहाँपुरी
मानूस हो चुके हैं तिरे आस्ताँ से हम
नसीम शाहजहाँपुरी
मैं हूँ तिरी निगाह में तू है मिरी निगाह में
नसीम शाहजहाँपुरी
किसी के इश्क़ में ये हाल-ए-ज़ार रहता है
नसीम शाहजहाँपुरी
इस लिए जफ़ाओं पर मुझ को मुस्कुराना था
नसीम शाहजहाँपुरी
हुस्न माइल ब-सितम हो तो ग़ज़ल होती है
नसीम शाहजहाँपुरी
ग़ुंचों के तबस्सुम पर हम ग़ौर नहीं करते
नसीम शाहजहाँपुरी
एक धुँदला सा सितारा भी बहुत होता है
नसीम शाहजहाँपुरी
रह-ए-जुनूँ में ग़म-ए-ज़िंदगी को मार दिया
नसीम साइललपुरी
वो एक लम्हा कि मुश्किल से कटने वाला था
नसीम सहर
थके हुओं को जो मंज़िल कठिन ज़ियादा हुई
नसीम सहर
सूरज के हम-सफ़र हैं हमारी उमंग ये
नसीम सहर
क़बा-ए-जाँ पुरानी हो गई क्या
नसीम सहर
कोई तो ज़ेहन के दर पर ज़रूर दस्तक दे
नसीम सहर
जो याद-ए-यार से गुफ़्त-ओ-शुनीद कर ली है
नसीम सहर
जब ख़बर ही न कोई मौसम-ए-गुल की आई
नसीम सहर
धूप से जिस्म बचाए रखना कितना मुश्किल है
नसीम सहर
बूँद पानी को मिरा शहर तरस जाता है
नसीम सहर
ब-नाम-ए-अम्न-ओ-अमाँ कौन मारा जाएगा
नसीम सहर
आप ही अपना सफ़र दुश्वार-तर मैं ने किया
नसीम सहर
उस तरफ़ से कोई तूफ़ान हवा ले के चली
नसीम निकहत
रात को शम्अ की मानिंद पिघल कर देखो
नसीम निकहत
मुझ को चराग़-ए-शाम की सूरत जला के देख
नसीम निकहत
बंजारे हैं रिश्तों की तिजारत नहीं करते
नसीम निकहत