Ghazal Poetry (page 524)

कहाँ न-जाने चला गया इंतिज़ार कर के

इरफ़ान सत्तार

कभी किसी से न हम ने कोई गिला रक्खा

इरफ़ान सत्तार

जो बे-रुख़ी का रंग बहुत तेज़ मुझ में है

इरफ़ान सत्तार

इधर कुछ दिन से दिल की बेकली कम हो गई है

इरफ़ान सत्तार

हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है

इरफ़ान सत्तार

हमें नहीं आते ये कर्तब नए ज़माने वाले

इरफ़ान सत्तार

ग़मों में कुछ कमी या कुछ इज़ाफ़ा कर रहे हैं

इरफ़ान सत्तार

एक तारीक ख़ला उस में चमकता हवा मैं

इरफ़ान सत्तार

इक ख़्वाब नींद का था सबब, जो नहीं रहा

इरफ़ान सत्तार

एक दुनिया की कशिश है जो इधर खींचती है

इरफ़ान सत्तार

दिल के पर्दे पे चेहरे उभरते रहे मुस्कुराते रहे और हम सो गए

इरफ़ान सत्तार

चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर-ए-अजल पड़ता है

इरफ़ान सत्तार

ब-ज़ोम-ए-अक़्ल ये कैसा गुनाह मैं ने किया

इरफ़ान सत्तार

अपनी ख़बर, न उस का पता है, ये इश्क़ है

इरफ़ान सत्तार

अजब है रंग-ए-चमन जा-ब-जा उदासी है

इरफ़ान सत्तार

अब तिरे लम्स को याद करने का इक सिलसिला और दीवाना-पन रह गया

इरफ़ान सत्तार

अब आ भी जाओ, बहुत दिन हुए मिले हुए भी

इरफ़ान सत्तार

आज बाम-ए-हर्फ़ पर इम्कान भर मैं भी तो हूँ

इरफ़ान सत्तार

होश जिस वक़्त भी आएगा गिरफ़्तारों को

इरफ़ान परभनवी

रस्म-ए-उल्फ़त से है मक़्सूद-ए-वफ़ा हो कि न हो

इरफ़ान अहमद मीर

पाबंद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त ही रहे गो दर्द-ए-दहिंदाँ और सही

इरफ़ान अहमद मीर

न मैं हाल-ए-दिल से ग़ाफ़िल न हूँ अश्क-बार अब तक

इरफ़ान अहमद मीर

न मैं हाल-ए-दिल से ग़ाफ़िल न हूँ अश्क-बार अब तक

इरफ़ान अहमद मीर

ख़ंदगी ख़ुश लब तबस्सुम मिस्ल-ए-अरमाँ हो गए

इरफ़ान अहमद मीर

थोड़ी सी दूर तेरी सदा ले गई हमें

इरफ़ान अहमद

सख़्त वीराँ है जहाँ तेरे बाद

इरफ़ान अहमद

नक़ाब चेहरे से उस के कभी सरकता था

इरफ़ान अहमद

है दर्द के इंतिसाब सा कुछ

इरफ़ान अहमद

एक ज़हरीली रिफ़ाक़त के सिवा है और क्या

इरफ़ान अहमद

मिरे पाँव में पायल की वही झंकार ज़िंदा है

इरम ज़ेहरा