Ghazal Poetry (page 55)
तमाम उम्र बड़े सख़्त इम्तिहान में था
वसीम बरेलवी
तहरीर से वर्ना मिरी क्या हो नहीं सकता
वसीम बरेलवी
सिर्फ़ तेरा नाम ले कर रह गया
वसीम बरेलवी
शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं
वसीम बरेलवी
सफ़र पे आज वही कश्तियाँ निकलती हैं
वसीम बरेलवी
सभी का धूप से बचने को सर नहीं होता
वसीम बरेलवी
सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ
वसीम बरेलवी
रंग बे-रंग हों ख़ुशबू का भरोसा जाए
वसीम बरेलवी
नहीं कि अपना ज़माना भी तो नहीं आया
वसीम बरेलवी
न जाने क्यूँ मुझे उस से ही ख़ौफ़ लगता है
वसीम बरेलवी
मुझे तो क़तरा ही होना बहुत सताता है
वसीम बरेलवी
मुझे बुझा दे मिरा दौर मुख़्तसर कर दे
वसीम बरेलवी
मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है
वसीम बरेलवी
मिटे वो दिल जो तिरे ग़म को ले के चल न सके
वसीम बरेलवी
मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारो
वसीम बरेलवी
मिरी वफ़ाओं का नश्शा उतारने वाला
वसीम बरेलवी
मेरे ग़म को जो अपना बताते रहे
वसीम बरेलवी
मेरा किया था मैं टूटा कि बिखरा रहा
वसीम बरेलवी
मैं ये नहीं कहता कि मिरा सर न मिलेगा
वसीम बरेलवी
मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा
वसीम बरेलवी
मैं अपने ख़्वाब से बिछड़ा नज़र नहीं आता
वसीम बरेलवी
मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता
वसीम बरेलवी
लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता
वसीम बरेलवी
क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता
वसीम बरेलवी
क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया
वसीम बरेलवी
कुछ इतना ख़ौफ़ का मारा हुआ भी प्यार न हो
वसीम बरेलवी
कितना दुश्वार था दुनिया ये हुनर आना भी
वसीम बरेलवी
ख़ुशी का साथ मिला भी तो दिल पे बार रहा
वसीम बरेलवी
खुल के मिलने का सलीक़ा आप को आता नहीं
वसीम बरेलवी
कहाँ सवाब कहाँ क्या अज़ाब होता है
वसीम बरेलवी