Ghazal Poetry (page 76)

फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइए

उर्फ़ी आफ़ाक़ी

बस्ता-लब था वो मगर सारे बदन से बोलता था

उर्फ़ी आफ़ाक़ी

ज़िंदाबाद ऐ दश्त के मंज़र ज़िंदाबाद

उनवान चिश्ती

वो मुस्कुरा के मोहब्बत से जब भी मिलते हैं

उनवान चिश्ती

तअ'स्सुब की फ़ज़ा में ता'ना-ए-किरदार क्या देता

उनवान चिश्ती

सारी दुनिया में दाना है अपने घर में कुछ भी नहीं

उनवान चिश्ती

रहने दे तकलीफ़-ए-तवज्जोह दिल को है आराम बहुत

उनवान चिश्ती

रात कई आवारा सपने आँखों में लहराए थे

उनवान चिश्ती

मिरे शानों पे उन की ज़ुल्फ़ लहराई तो क्या होगा

उनवान चिश्ती

किसी के फ़ैज़-ए-क़ुर्ब से हयात अब सँवर गई

उनवान चिश्ती

कहते हैं अज़ल जिस को उस से भी कहीं पहले

उनवान चिश्ती

जब ज़ुल्फ़ शरीर हो गई है

उनवान चिश्ती

इश्क़ फिर इश्क़ है आशुफ़्ता-सरी माँगे है

उनवान चिश्ती

हुस्न से आँख लड़ी हो जैसे

उनवान चिश्ती

बच्चे भी अब देख के उस को हँसते हैं

उनवान चिश्ती

आज अचानक फिर ये कैसी ख़ुशबू फैली यादों की

उनवान चिश्ती

ज़हर में बुझती हुई बेल है दीवार के साथ

उम्मीद ख़्वाजा

थम ज़रा वक़्त-ए-अजल दीदार-ए-जाँ होने लगा

उम्मीद ख़्वाजा

रूठना चाहो तो अब हरगिज़ मनाने का नहीं

उम्मीद ख़्वाजा

ज़ेहन-ओ-दिल में कुछ न कुछ रिश्ता भी था

उम्मीद फ़ाज़ली

वो ख़्वाब ही सही पेश-ए-नज़र तो अब भी है

उम्मीद फ़ाज़ली

तुम हो जो कुछ कहाँ छुपाओगे

उम्मीद फ़ाज़ली

तुम हो जो कुछ कहाँ छुपाओगे

उम्मीद फ़ाज़ली

नज़र न आए तो क्या वो मिरे क़यास में है

उम्मीद फ़ाज़ली

नाज़ कर नाज़ कि ये नाज़ जुदा है सब से

उम्मीद फ़ाज़ली

मक़्तल-ए-जाँ से कि ज़िंदाँ से कि घर से निकले

उम्मीद फ़ाज़ली

किसी से और तो क्या गुफ़्तुगू करें दिल की

उम्मीद फ़ाज़ली

कब तक इस प्यास के सहरा में झुलसते जाएँ

उम्मीद फ़ाज़ली

जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया

उम्मीद फ़ाज़ली

हम तिरा अहद-ए-मोहब्बत ठहरे

उम्मीद फ़ाज़ली