Ghazal Poetry (page 78)

इश्क़ में हर तमन्ना-ए-क़ल्ब-ए-हज़ीं सुर्ख़ आँसू बहाए तो मैं क्या करूँ

तुर्फ़ा क़ुरैशी

देखा है कहीं रंग-ए-सहर वक़्त से पहले

तुर्फ़ा क़ुरैशी

हम से पहले भी इस जग में पीत हुई है मन टूटे हैं

तुफ़ैल दारा

ज़ुल्म को तेरे ये ताक़त नहीं मिलने वाली

तुफ़ैल चतुर्वेदी

कोई वादा न देंगे दान में क्या

तुफ़ैल चतुर्वेदी

ग़ज़ल का सिलसिला था याद होगा

तुफ़ैल चतुर्वेदी

दिल ने फिर चाहा उजाले का समुंदर होना

तुफ़ैल चतुर्वेदी

धूप होते हुए बादल नहीं माँगा करते

तुफ़ैल चतुर्वेदी

शिद्दत-ए-इज़हार-ए-मज़मूँ से है घबराई हुई

तुफ़ैल बिस्मिल

फूल होंटों को ग़ज़ल-ख़्वाँ देखना

तुफ़ैल बिस्मिल

जो भी तेरी आँख को भा जाएगा

तुफ़ैल बिस्मिल

इक बहाना है तुझे याद किए जाने का

तुफ़ैल बिस्मिल

ताइर-ए-ख़ुश-रंग को बे-बाल-ओ-पर देखेगा कौन

तुफ़ैल अहमद मदनी

मुस्कुराएगा मगर बात नहीं मानेगा

तुफ़ैल अहमद मदनी

जीना है तो जीने की पहली सी अदा माँगो

तुफ़ैल अहमद मदनी

ज़िंदगानी का कोई बाब समझ लो लड़की

त्रिपुरारि

वो तो मिल कर भी नहीं मिलती है

त्रिपुरारि

उस ने ख़ुद फ़ोन पे ये मुझ से कहा अच्छा था

त्रिपुरारि

तजरबा जो भी है मेरा मैं वही लिखता हूँ

त्रिपुरारि

पुरानी चोट मैं कैसे दिखाऊँ

त्रिपुरारि

न जाने क्या कमी थी चाहतों में

त्रिपुरारि

मोहब्बत में शिकायत कर रहा हूँ

त्रिपुरारि

मैं ख़ुद अपना लहू पीने लगा हूँ

त्रिपुरारि

कभी किसी ने जो दिल दुखाया तो दिल को समझा गई उदासी

त्रिपुरारि

जाने फिर उस के दिल में क्या बात आ गई थी

त्रिपुरारि

इस तरह रस्म मोहब्बत की अदा होती है

त्रिपुरारि

भाड़े का इक मकाँ हूँ मुझ को ख़बर नहीं है

त्रिपुरारि

अश्क-दर-अश्क वही लोग रवाँ मिलते हैं

त्रिपुरारि

बे-क़रारी सी बे-क़रारी है

तौसीफ ताबिश

आइने के रू-ब-रू इक आइना रखता हूँ मैं

तौसीफ ताबिश