Ghazal Poetry (page 871)
मुझ को आता है तयम्मुम न वज़ू आता है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मिरे करीम इनायत से तेरी क्या न मिला
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मस्कन वहीं कहीं है वहीं आशियाँ कहीं
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मैं ख़ुदी में मुब्तिला ख़ुद को मिटाने के लिए
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
लाख लाख एहसान जिस ने दर्द पैदा कर दिया
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
क्या ख़बर थी राज़-ए-दिल अपना अयाँ हो जाएगा
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
क्या कर रहे हो ज़ुल्म करो राह राह का
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जिस ने तुझे ख़ल्वत में भी तन्हा नहीं देखा
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जब्र को इख़्तियार कौन करे
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जान देते ही बनी इश्क़ के दीवाने से
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
गिरी गिर कर उठी पलटी तो जो कुछ था उठा लाई
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
दिल सर्द हो गया है तबीअत बुझी हुई
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बुतों के वास्ते तो दीन-ओ-ईमाँ बेच डाले हैं
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बहार आई है फिर चमन में नसीम इठला के चल रही है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
गर एक शब भी वस्ल की लज़्ज़त न पाए दिल
आग़ा मोहम्मद तक़ी
याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
तुम और फ़रेब खाओ बयान-ए-रक़ीब से
आग़ा हश्र काश्मीरी
सू-ए-मय-कदा न जाते तो कुछ और बात होती
आग़ा हश्र काश्मीरी
चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की
आग़ा हश्र काश्मीरी
वो रंगत तू ने ऐ गुल-रू निकाली
आग़ा हज्जू शरफ़
उड़ कर सुराग़-ए-कूचा-ए-दिलबर लगाइए
आग़ा हज्जू शरफ़
तीर-ए-नज़र से छिद के दिल-अफ़गार ही रहा
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरछी नज़र न हो तरफ़-ए-दिल तो क्या करूँ
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरी हवस में जो दिल से पूछा निकल के घर से किधर को चलिए
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरी गली में जो धूनी रमाए बैठे हैं
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरे वास्ते जान पे खेलेंगे हम ये समाई है दिल में ख़ुदा की क़सम
आग़ा हज्जू शरफ़
तेरे आलम का यार क्या कहना
आग़ा हज्जू शरफ़
तलाश-ए-क़ब्र में यूँ घर से हम निकल के चले
आग़ा हज्जू शरफ़
सन्नाटे का आलम क़ब्र में है है ख़्वाब-ए-अदम आराम नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
सलफ़ से लोग उन पे मर रहे हैं हमेशा जानें लिया करेंगे
आग़ा हज्जू शरफ़