Ghazal Poetry (page 875)

सब को बता रहा हूँ यही साफ़ साफ़ मैं

अफ़ज़ल गौहर राव

नींद आई न खुला रात का बिस्तर मुझ से

अफ़ज़ल गौहर राव

मिसाल-ए-बर्ग किसी शाख़ से झड़े हुए हैं

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं सुन रहा हूँ जो दुनिया सुना रही है मुझे

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं ख़ुद को इस लिए मंज़र पे लाने वाला नहीं

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं अपनी ज़ात में जब से सितारा होने लगा

अफ़ज़ल गौहर राव

इसी लिए भी नए सफ़र से बंधे हुए हैं

अफ़ज़ल गौहर राव

हिज्र में इतना ख़सारा तो नहीं हो सकता

अफ़ज़ल गौहर राव

हर आइने में तिरा ही धुआँ दिखाई दिया

अफ़ज़ल गौहर राव

देर तक कोई किसी से बद-गुमाँ रहता नहीं

अफ़ज़ल गौहर राव

चुप-चाप निकल आए थे सहरा की तरफ़ हम

अफ़ज़ल गौहर राव

आई थी उस तरफ़ जो हवा कौन ले गया

अफ़ज़ल गौहर राव

गुज़रे तअ'ल्लुक़ात का अब वास्ता न दे

अफ़ज़ल अलवी

यूँ इलाज-ए-दिल बीमार किया जाएगा

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ये हक़ीक़त है वो कमज़ोर हुआ करती हैं

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ये बता दे मुझ को मेरे दिल किसे आवाज़ दूँ

अफ़ज़ल इलाहाबादी

यादों के नशेमन को जलाया तो नहीं है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं

अफ़ज़ल इलाहाबादी

तेरे जल्वों को रू-ब-रू कर के

अफ़ज़ल इलाहाबादी

सुलगती रेत पे तहरीर जो कहानी है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

मिरी दीवानगी की हद न पूछो तुम कहाँ तक है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

लुटा रहा हूँ मैं लाल-ओ-गुहर अँधेरे में

अफ़ज़ल इलाहाबादी

किसी की याद रुलाये तो क्या किया जाए

अफ़ज़ल इलाहाबादी

कर दिया ख़ुद को समुंदर के हवाले हम ने

अफ़ज़ल इलाहाबादी

जो मिरी आरज़ू नहीं करता

अफ़ज़ल इलाहाबादी

हर नग़मा-ए-पुर-दर्द हर इक साज़ से पहले

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ग़मों की धूप में मिलते हैं साएबाँ बन कर

अफ़ज़ल इलाहाबादी

दवा-ए-दर्द-ए-ग़म-ओ-इज़्तिराब क्या देता

अफ़ज़ल इलाहाबादी

बुलंदी से कभी वो आश्नाई कर नहीं सकता

अफ़ज़ल इलाहाबादी