Ghazal Poetry (page 876)
अश्क आँखों में लिए आठों पहर देखेगा कौन
अफ़ज़ल इलाहाबादी
अपनी तन्हाइयों के ग़ार में हूँ
अफ़ज़ल इलाहाबादी
अब तो हर एक अदाकार से डर लगता है
अफ़ज़ल इलाहाबादी
ये नहर-ए-आब भी उस की है मुल्क-ए-शाम उस का
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
सितम की तेग़ पे ये दस्त-ए-बे-नियाम रक्खा
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
सहाब-ए-सब्ज़ न ताऊस-ए-नीलमीं लाया
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
रौशन वो दिल पे मेरे दिल-आज़ार से हुआ
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
कुछ और रंग मैं तरतीब-ए-ख़ुश्क-ओ-तर करता
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
कोई न हर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बर कहा उस ने
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
कभी न ख़ुद को बद-अंदेश-ए-दश्त-ओ-दर रक्खा
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
हुआ है क़त्अ मिरा दस्त-ए-मोजज़ा तुझ पे
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
गिरा तो गिर के सर-ए-ख़ाक-ए-इब्तिज़ाल आया
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
इक शाम ये सफ़्फ़ाक ओ बद-अंदेश जला दे
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
दुआ की राख पे मरमर का इत्र-दाँ उस का
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
बहुत न हौसला-ए-इज़्ज़-ओ-जाह मुझ से हुआ
अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
मैं ख़ाक में मिले हुए गुलाब देखता रहा
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
कर भी लूँ अगर ख़्वाब की ताबीर कोई और
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
जब अपनों से दूर पराए देस में रहना पड़ता है
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
इस तरह सताया है परेशान किया है
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
ग़म का मौसम बीत गया सो रोना क्या
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
दीवारों में दर होता तो अच्छा था
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
दरीचे में सितारा जागता है
अफ़ज़ाल फ़िरदौस
टूटा हुआ आईना जो रस्ते में पड़ा था
आफ़ताब शम्सी
तलाश-ए-क़ाफ़िया में उम्र सब गुज़ारी है
आफ़ताब शम्सी
सभी बिछड़ गए मुझ से गुज़रते पल की तरह
आफ़ताब शम्सी
पयाम-ए-आश्ती इक ढोंग दोस्ती का था
आफ़ताब शम्सी
कोई अच्छी सी ग़ज़ल कानों में मेरे घोल दे
आफ़ताब शम्सी
जू-ए-रवाँ हूँ ठहरा समुंदर नहीं हूँ मैं
आफ़ताब शम्सी
जो दिल में है वही बाहर दिखाई देता है
आफ़ताब शम्सी
देर तक रात अँधेरे में जो मैं ने देखा
आफ़ताब शम्सी