ख्वाब Poetry (page 5)
दयार-ए-दिल में नया नया सा चराग़ कोई जला रहा है
इक़बाल अशहर
बदन में अव्वलीं एहसास है तकानों का
इक़बाल अशहर
छोटी ही सही बात की तासीर तो देखो
इक़बाल अंजुम
बैठ जाता था मैं थक कर अपने तन की छाँव में
इंतिख़ाब अालम
ज़ुल्फ़ को था ख़याल बोसे का
इंशा अल्लाह ख़ान
ये किस से चाँदनी में हम ब-ज़ेर-ए-आसमाँ लिपटे
इंशा अल्लाह ख़ान
ये जो मुझ से और जुनूँ से याँ बड़ी जंग होती है देर से
इंशा अल्लाह ख़ान
वो देखा ख़्वाब क़ासिर जिस से है अपनी ज़बाँ और हम
इंशा अल्लाह ख़ान
टुक इक ऐ नसीम सँभाल ले कि बहार मस्त-ए-शराब है
इंशा अल्लाह ख़ान
शब ख़्वाब में देखा था मजनूँ को कहीं अपने
इंशा अल्लाह ख़ान
मुझे क्यूँ न आवे साक़ी नज़र आफ़्ताब उल्टा
इंशा अल्लाह ख़ान
मिल गए पर हिजाब बाक़ी है
इंशा अल्लाह ख़ान
काश अब्र करे चादर-ए-महताब की चोरी
इंशा अल्लाह ख़ान
कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं
इंशा अल्लाह ख़ान
जब तक कि ख़ूब वाक़िफ़-ए-राज़-ए-निहाँ न हूँ
इंशा अल्लाह ख़ान
है तिरा गाल माल बोसे का
इंशा अल्लाह ख़ान
गली से तेरी जो टुक हो के आदमी निकले
इंशा अल्लाह ख़ान
दिल-ए-सितम-ज़दा बेताबियों ने लूट लिया
इंशा अल्लाह ख़ान
भले आदमी कहीं बाज़ आ अरे उस परी के सुहाग से
इंशा अल्लाह ख़ान
बात के साथ ही मौजूद है टाल एक न एक
इंशा अल्लाह ख़ान
ख़ुदा से कलाम
इंजिला हमेश
हर्फ़-ए-मुक़द्दर
इंजिला हमेश
अन-देखी ज़मीं पर
इंजिला हमेश
सस्ती नज़्म
इंजील सहीफ़ा
अन-छूई कथा
इंजील सहीफ़ा
फ़ज़ा में रंग से बिखरे हैं चाँदनी हुई है
इंजील सहीफ़ा
टूटा फूटा सही एहसास-ए-अना है मुझ में
इंद्र सरूप श्रीवास्तवा
पानी मिट कर भी रह गया पानी
इंद्र मोहन मेहता कैफ़
ये मौसम सुरमई है और मैं हूँ
इन्दिरा वर्मा
तिरे ख़याल का चर्चा तिरे ख़याल की बात
इन्दिरा वर्मा