ख्वाब Poetry (page 73)

फूल पत्थर की चटानों पे खिलाएँ हम भी

असग़र मेहदी होश

मेरा बचपन ही मुझे याद दिलाने आए

असग़र मेहदी होश

जो इस ज़मीर फ़रोशी के माहेरीन में है

असग़र मेहदी होश

चेहरों को बे-नक़ाब समझने लगा था मैं

असग़र मेहदी होश

बाहर का माहौल तो हम को अक्सर अच्छा लगता है

असग़र मेहदी होश

सुनता हूँ बड़े ग़ौर से अफ़्साना-ए-हस्ती

असग़र गोंडवी

हल कर लिया मजाज़ हक़ीक़त के राज़ को

असग़र गोंडवी

तू एक नाम है मगर सदा-ए-ख़्वाब की तरह

असग़र गोंडवी

शिकवा न चाहिए कि तक़ाज़ा न चाहिए

असग़र गोंडवी

रक़्स-ए-मस्ती देखते जोश-ए-तमन्ना देखते

असग़र गोंडवी

पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए

असग़र गोंडवी

मजाज़ कैसा कहाँ हक़ीक़त अभी तुझे कुछ ख़बर नहीं है

असग़र गोंडवी

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

इक आलम-ए-हैरत है फ़ना है न बक़ा है

असग़र गोंडवी

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

वो उन का हिजाब और नज़ाकत के नज़ारे

असर रामपुरी

हिजाब-ए-रंग-ओ-बू है और मैं हूँ

असर लखनवी

बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए

असर लखनवी

आह से जब दिल में डूबे तीर उभारे जाएँगे

असर लखनवी

नौ मंज़िला बिल्डिंग

असद मोहम्मद ख़ाँ

ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा

असद जाफ़री

इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया

असद भोपाली

गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे

असद भोपाली

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

मेरी रुस्वाई के अस्बाब हैं मेरे अंदर

असअ'द बदायुनी

कभी मौज-ए-ख़्वाब में खो गया कभी थक के रेत पे सो गया

असअ'द बदायुनी

जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया

असअ'द बदायुनी

ये लोग ख़्वाब बहुत कर्बला के देखते हैं

असअ'द बदायुनी

सैल-ए-गिर्या का सीने से रिश्ता बहुत

असअ'द बदायुनी