ख्वाब Poetry (page 75)
किस के सवाल पर ये दिल रोता है सारी सारी रात
अरशद लतीफ़
तिरे ख़याल से फिर आँख मेरी पुर-नम है
अरशद लतीफ़
कोई नहीं है इंतिज़ार सुब्ह-ए-विसाल के सिवा
अरशद लतीफ़
मुझ को तलाश करते हो औरों के दरमियाँ
अरशद कमाल
नफ़ी ओ इसबात
अरशद कमाल
हर एक लम्हा-ए-ग़म बहर-ए-बे-कराँ की तरह
अरशद कमाल
इक लफ़्ज़ आ गया था जो मेरी ज़बान पर
अरशद कमाल
जाने किस रुत में खिलेंगे यहाँ ताबीर के फूल
अरशद जमाल 'सारिम'
प्यास हर ज़र्रा-ए-सहरा की बुझाई गई है
अरशद जमाल 'सारिम'
नित-नए नक़्श से बातिन को सजाता हुआ मैं
अरशद जमाल 'सारिम'
सपेदी रंग-ए-जहाँ में नहीं मिलाता हूँ
अरशद जमाल हश्मी
ख़्वाब क्या है कि टूटता ही नहीं
अरशद जमाल हश्मी
आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली
अरशद जमाल हश्मी
फिर गया आँखों में उस कान के मोती का ख़याल
अरशद अली ख़ान क़लक़
चला है छोड़ के तन्हा किधर तसव्वुर-ए-यार
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये बारीक उन की कमर हो गई
अरशद अली ख़ान क़लक़
यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा
अरशद अली ख़ान क़लक़
सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का
अरशद अली ख़ान क़लक़
लूटे मज़े जो हम ने तुम्हारे उगाल के
अरशद अली ख़ान क़लक़
जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
हम ने एहसान असीरी का न बर्बाद किया
अरशद अली ख़ान क़लक़
डोरा नहीं है सुरमे का चश्म-ए-सियाह में
अरशद अली ख़ान क़लक़
दिल में आते ही ख़ुशी साथ ही इक ग़म आया
अरशद अली ख़ान क़लक़
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
आएँगे वो तो आप में हरगिज़ न आएँगे
अरशद अली ख़ान क़लक़
मुद्दतों घाव किए जिस के बदन पर हम ने
अरशद अब्दुल हमीद
सुख़न के चाक में पिन्हाँ तुम्हारी चाहत है
अरशद अब्दुल हमीद
मुझ को तक़दीर ने यूँ बे-सर-ओ-आसार किया
अरशद अब्दुल हमीद
मुझ सा बेताब यहाँ कोई नहीं मेरे सिवा
अरशद अब्दुल हमीद