Heart Broken Poetry (page 135)
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
ये कहाँ से मौज-ए-तरब उठी कि मलाल दिल से निकल गए
फ़रीद जावेद
तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे
फ़रीद जावेद
तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे
फ़रीद जावेद
तल्ख़ गुज़रे कि शादमाँ गुज़रे
फ़रीद जावेद
पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके
फ़रीद जावेद
पहुँच के हम सर-ए-मंज़िल जिन्हें भुला न सके
फ़रीद जावेद
ना-शगुफ़्ता कलियों में शौक़ है तबस्सुम का
फ़रीद जावेद
न ग़ुरूर है ख़िरद को न जुनूँ में बाँकपन है
फ़रीद जावेद
न ग़ुरूर है ख़िरद को न जुनूँ में बाँकपन है
फ़रीद जावेद
मय-कदे के सिवा मिली है कहाँ
फ़रीद जावेद
क्या बदल दोगे तुम इक नज़र से
फ़रीद जावेद
किस उजाले का निशाँ हैं हम लोग
फ़रीद जावेद
जब भी शम-ए-तरब जलाई है
फ़रीद जावेद
हम जिसे समझते थे सई-ए-राएगाँ यारो
फ़रीद जावेद
यक़ीन
फ़रीद इशरती
तक़ाज़ा
फ़रीद इशरती
सहर होने तक
फ़रीद इशरती
काग़ज़ के फूल
फ़रीद इशरती
जब तमन्नाएँ मुस्कुराती हैं
फ़रीद इशरती
फ़नकार और मौत
फ़रीद इशरती
बे-बाक अँधेरे
फ़रीद इशरती
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
फ़रीद इशरती
अफ़्साना-ए-शब-रंग
फ़रीद इशरती
कुछ उन की जफ़ा उन का सितम याद नहीं है
फ़रीद इशरती
दिल में शगुफ़्ता गुल भी हैं रौशन चराग़ भी
फ़रीद इशरती
ये दिल है दिल इसे सीने में हरगिज़
फ़राज़ सुल्तानपूरी
धूप की सख़्ती तो थी लेकिन 'फ़राज़'
फ़राज़ सुल्तानपूरी
वो अक्स-ए-दिल-ए-आश्ना छोड़ आए
फ़राज़ सुल्तानपूरी
निकल के घर से और मैदाँ में आ के
फ़राज़ सुल्तानपूरी