Heart Broken Poetry (page 137)

कभी हरीफ़ कभी हम-नवा हमीं ठहरे

फ़राग़ रोहवी

जो भी अंजाम हो आग़ाज़ किए देते हैं

फ़राग़ रोहवी

हमारे साथ उमीद-ए-बहार तुम भी करो

फ़राग़ रोहवी

दिन में भी हसरत-ए-महताब लिए फिरते हैं

फ़राग़ रोहवी

देखा जो आईना तो मुझे सोचना पड़ा

फ़राग़ रोहवी

दयार-ए-शब का मुक़द्दर ज़रूर चमकेगा

फ़राग़ रोहवी

मैं ख़ुश हुआ कि बूद में रक्खा गया मुझे

फ़क़ीह हैदर

जिस्म में गूँजता है रूह पे लिक्खा दुख है

फ़क़ीह हैदर

हिज्र मैं जो ली गई तस्वीर है

फ़क़ीह हैदर

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं

फ़ानी बदायुनी

ज़माना बर-सर-ए-आज़ार था मगर 'फ़ानी'

फ़ानी बदायुनी

या-रब तिरी रहमत से मायूस नहीं 'फ़ानी'

फ़ानी बदायुनी

उस को भूले तो हुए हो 'फ़ानी'

फ़ानी बदायुनी

शिकवा-ए-हिज्र पे सर काट के फ़रमाते हैं

फ़ानी बदायुनी

रूह अरबाब-ए-मोहब्बत की लरज़ जाती है

फ़ानी बदायुनी

रोज़-ए-जज़ा गिला तो क्या शुक्र-ए-सितम ही बन पड़ा

फ़ानी बदायुनी

फिर किसी की याद ने तड़पा दिया

फ़ानी बदायुनी

ना-मेहरबानियों का गिला तुम से क्या करें

फ़ानी बदायुनी

न इंतिहा की ख़बर है न इंतिहा मालूम

फ़ानी बदायुनी

न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम

फ़ानी बदायुनी

मौजों की सियासत से मायूस न हो 'फ़ानी'

फ़ानी बदायुनी

मर के टूटा है कहीं सिलसिला-ए-क़ैद-ए-हयात

फ़ानी बदायुनी

करम-ए-बे-हिसाब चाहा था

फ़ानी बदायुनी

जौर को जौर भी अब क्या कहिए

फ़ानी बदायुनी

जल्वा ओ दिल में फ़र्क़ नहीं जल्वे को ही अब दिल कहते हैं

फ़ानी बदायुनी

इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है

फ़ानी बदायुनी

हिज्र में मुस्कुराए जा दिल में उसे तलाश कर

फ़ानी बदायुनी

हर तबस्सुम का दिया एक तबस्सुम से जवाब

फ़ानी बदायुनी

दिल-ए-आबाद का 'फ़ानी' कोई मफ़्हूम नहीं

फ़ानी बदायुनी

अपनी ही निगाहों का ये नज़्ज़ारा कहाँ तक

फ़ानी बदायुनी