Heart Broken Poetry (page 138)
अब नए सुर से छेड़ पर्दा-ए-साज़
फ़ानी बदायुनी
ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं
फ़ानी बदायुनी
ज़ब्त अपना शिआर था न रहा
फ़ानी बदायुनी
ज़बाँ मुद्दआ-आश्ना चाहता हूँ
फ़ानी बदायुनी
यूँ नज़्म-ए-जहाँ दरहम-ओ-बरहम न हुआ था
फ़ानी बदायुनी
ये किस क़यामत की बेकसी है ज़मीं ही अपना न यार मेरा
फ़ानी बदायुनी
याँ होश से बे-ज़ार हुआ भी नहीं जाता
फ़ानी बदायुनी
वो पूछते हैं हिज्र में है इज़्तिराब क्या
फ़ानी बदायुनी
वो मश्क़-ए-ख़ू-ए-तग़ाफ़ुल फिर एक बार रहे
फ़ानी बदायुनी
वो कहते हैं कि है टूटे हुए दिल पर करम मेरा
फ़ानी बदायुनी
वो जी गया जो इश्क़ में जी से गुज़र गया
फ़ानी बदायुनी
वाहिमे की ये मश्क़-ए-पैहम क्या
फ़ानी बदायुनी
वादी-ए-शौक़ में वारफ़्ता-ए-रफ़्तार हैं हम
फ़ानी बदायुनी
सितम-ईजाद रहोगे सितम-ईजाद रहे
फ़ानी बदायुनी
शबाब-ए-होश कि फ़िल-जुमला यादगार हुई
फ़ानी बदायुनी
सवाल-ए-दीद पे तेवरी चढ़ाई जाती है
फ़ानी बदायुनी
संग-ए-दर देख के सर याद आया
फ़ानी बदायुनी
क़तरा दरिया-ए-आश्नाई है
फ़ानी बदायुनी
क़सम न खाओ तग़ाफ़ुल से बाज़ आने की
फ़ानी बदायुनी
नाम बदनाम है नाहक़ शब-ए-तन्हाई का
फ़ानी बदायुनी
नहीं मंज़ूर तप-ए-हिज्र का रुस्वा होना
फ़ानी बदायुनी
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मा'लूम
फ़ानी बदायुनी
मुझ को मिरे नसीब ने रोज़-ए-अज़ल से क्या दिया
फ़ानी बदायुनी
मोहताज-ए-अजल क्यूँ है ख़ुद अपनी क़ज़ा हो जा
फ़ानी बदायुनी
मिज़ाज-ए-दहर में उन का इशारा पाए जा
फ़ानी बदायुनी
मेरे लब पर कोई दुआ ही नहीं
फ़ानी बदायुनी
माया-ए-नाज़-ए-राज़ हैं हम लोग
फ़ानी बदायुनी
मर के टूटा है कहीं सिलसिला-क़ैद-ए-हयात
फ़ानी बदायुनी
मर कर तिरे ख़याल को टाले हुए तो हैं
फ़ानी बदायुनी
मर कर मरीज़-ए-ग़म की वो हालत नहीं रही
फ़ानी बदायुनी