Heart Broken Poetry (page 140)
दिल की हर लर्ज़िश-ए-मुज़्तर पे नज़र रखते हैं
फ़ानी बदायुनी
दिल और दिल में याद किसी ख़ुश-ख़िराम की
फ़ानी बदायुनी
दैर में या हरम में गुज़रेगी
फ़ानी बदायुनी
बिजलियाँ टूट पड़ीं जब वो मुक़ाबिल से उठा
फ़ानी बदायुनी
बे-ज़ौक़-ए-नज़र बज़्म-ए-तमाशा न रहेगी
फ़ानी बदायुनी
बेदाद के ख़ूगर थे फ़रियाद तो क्या करते
फ़ानी बदायुनी
बे-अजल काम न अपना किसी उनवाँ निकला
फ़ानी बदायुनी
अपनी जन्नत मुझे दिखला न सका तू वाइज़
फ़ानी बदायुनी
ऐ मौत तुझ पे उम्र-ए-अबद का मदार है
फ़ानी बदायुनी
ऐ अजल ऐ जान-ए-'फ़ानी' तू ने ये क्या कर दिया
फ़ानी बदायुनी
अदा से आड़ में ख़ंजर के मुँह छुपाए हुए
फ़ानी बदायुनी
अब उन्हें अपनी अदाओं से हिजाब आता है
फ़ानी बदायुनी
अब लब पे वो हंगामा-ए-फ़रियाद नहीं है
फ़ानी बदायुनी
आप से शरह-ए-आरज़ू तो करें
फ़ानी बदायुनी
आह से या आह की तासीर से
फ़ानी बदायुनी
आह अब तक तो बे-असर न हुई
फ़ानी बदायुनी
ज़िंदगी नाम है इक जोहद-ए-मुसलसल का 'फ़ना'
फ़ना निज़ामी कानपुरी
साहिल के तमाशाई हर डूबने वाले पर
फ़ना निज़ामी कानपुरी
क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात भी क्या चीज़ है 'फ़ना'
फ़ना निज़ामी कानपुरी
कुछ दर्द की शिद्दत है कुछ पास-ए-मोहब्बत है
फ़ना निज़ामी कानपुरी
जब सफ़ीना मौज से टकरा गया
फ़ना निज़ामी कानपुरी
ग़ैरत-ए-अहल-ए-चमन को क्या हुआ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
फ़ना निज़ामी कानपुरी
अंधेरों को निकाला जा रहा है
फ़ना निज़ामी कानपुरी
आज उस से मैं ने शिकवा किया था शरारतन
फ़ना निज़ामी कानपुरी
यूँ इंतिक़ाम तुझ से फ़स्ल-ए-बहार लेंगे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
वो ख़ानुमाँ-ख़राब न क्यूँ दर-ब-दर फिरे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
वो जाने कितना सर-ए-बज़्म शर्मसार हुआ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
साक़िया तू ने मिरे ज़र्फ़ को समझा क्या है
फ़ना निज़ामी कानपुरी