Heart Broken Poetry (page 149)
सुब्ह की आज जो रंगत है वो पहले तो न थी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शरह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शैख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सहल यूँ राह-ए-ज़िंदगी की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सभी कुछ है तेरा दिया हुआ सभी राहतें सभी कुल्फ़तें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
क़ंद-ए-दहन कुछ इस से ज़ियादा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर लौटा है ख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब सफ़र से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ मोहतसिबों की ख़ल्वत में कुछ वाइ'ज़ के घर जाती है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो' ज़ियादा रखते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब तक दिल की ख़ैर मनाएँ कब तक रह दिखलाओगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जैसे हम-बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इश्क़ मिन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इज्ज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हुस्न मरहून-ए-जोश-ए-बादा-ए-नाज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम मुसाफ़िर यूँही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़