Heart Broken Poetry (page 151)
जिस्म थकता नहीं चलने से कि वहशत का सफ़र
फ़ैसल अजमी
उस को जाने दे अगर जाता है
फ़ैसल अजमी
तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त
फ़ैसल अजमी
शामियानों की वज़ाहत तो नहीं की गई है
फ़ैसल अजमी
रख़्त-ए-सफ़र है इस में क़रीना भी चाहिए
फ़ैसल अजमी
मुझ को ये फ़िक्र कब है कि साया कहाँ गया
फ़ैसल अजमी
मैं ज़ख़्म खा के गिरा था कि थाम उस ने लिया
फ़ैसल अजमी
मैं ग़ार में था और हवा के बग़ैर था
फ़ैसल अजमी
इन लोगों में रहने से हम बेघर अच्छे थे
फ़ैसल अजमी
हिज्र मौजूद है फ़साने में
फ़ैसल अजमी
हर्फ़ अपने ही मआनी की तरह होता है
फ़ैसल अजमी
हर शख़्स परेशान है घबराया हुआ है
फ़ैसल अजमी
गिर जाए जो दीवार तो मातम नहीं करते
फ़ैसल अजमी
दुख नहीं है कि जल रहा हूँ मैं
फ़ैसल अजमी
अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है
फ़ैसल अजमी
ज़बानों का बोसा
फ़हमीदा रियाज़
उस का दिल तो अच्छा दिल था
फ़हमीदा रियाज़
तफ़्सील मसाफ़त की
फ़हमीदा रियाज़
सोच
फ़हमीदा रियाज़
पूर्वांचल
फ़हमीदा रियाज़
पत्थर की ज़बान
फ़हमीदा रियाज़
नज़्र-ए-फ़िराक़
फ़हमीदा रियाज़
मेघ दूत
फ़हमीदा रियाज़
जाप
फ़हमीदा रियाज़
इंक़िलाबी औरत
फ़हमीदा रियाज़
एक ज़न-ए-ख़ाना-ब-दोश
फ़हमीदा रियाज़
एक लड़की से
फ़हमीदा रियाज़
दिल्ली तिरी छाँव…
फ़हमीदा रियाज़
चादर और चार-दीवारी
फ़हमीदा रियाज़
बैठा है मेरे सामने वो
फ़हमीदा रियाज़