Heart Broken Poetry (page 152)

अक़्लीमा

फ़हमीदा रियाज़

आलम-ए-बर्ज़ख़

फ़हमीदा रियाज़

चार-सू है बड़ी वहशत का समाँ

फ़हमीदा रियाज़

ज़रा मोहतात होना चाहिए था

फ़हमी बदायूनी

तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं

फ़हमी बदायूनी

सहराओं ने माँगा पानी

फ़हमी बदायूनी

पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा

फ़हमी बदायूनी

नहीं हो तुम तो ऐसा लग रहा है

फ़हमी बदायूनी

मौत की सम्त जान चलती रही

फ़हमी बदायूनी

कोई मिलता नहीं ख़ुदा की तरह

फ़हमी बदायूनी

ख़त लिफ़ाफ़े में ग़ैर का निकला

फ़हमी बदायूनी

एक मेहमाँ का हिज्र तारी है

फ़हमी बदायूनी

चलती साँसों को जाम करने लगा

फ़हमी बदायूनी

यूँ जगमगा उठा है तिरी याद से वजूद

फ़हीम शनास काज़मी

उसी ने चाँद के पहलू में इक चराग़ रखा

फ़हीम शनास काज़मी

तुम्हारी याद निकलती नहीं मिरे दिल से

फ़हीम शनास काज़मी

फिर वही शाम वही दर्द वही अपना जुनूँ

फ़हीम शनास काज़मी

कोई भी रस्ता किसी सम्त को नहीं जाता

फ़हीम शनास काज़मी

किसी के दिल में उतरना है कार-ए-ला-हासिल

फ़हीम शनास काज़मी

बिछड़ के तुझ से तिरी याद भी नहीं आई

फ़हीम शनास काज़मी

ज़िंदगी से मुकालिमा

फ़हीम शनास काज़मी

ज़मीं ख़्वाब ख़ुश्बू

फ़हीम शनास काज़मी

वो और मैं....

फ़हीम शनास काज़मी

शब-गर्दों के लिए इक नज़्म

फ़हीम शनास काज़मी

सारबाँ

फ़हीम शनास काज़मी

सब्र की चादर तह कर दी

फ़हीम शनास काज़मी

सब खेल-तमाशा ख़त्म हुआ

फ़हीम शनास काज़मी

राहदारी में गूँजती नज़्म

फ़हीम शनास काज़मी

क़िस्सा तमाम

फ़हीम शनास काज़मी

मुझे कौन बुलाता रहता है

फ़हीम शनास काज़मी