Heart Broken Poetry (page 154)
तुझ बदन पर जो लाल सारी है
फ़ाएज़ देहलवी
मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया
फ़ाएज़ देहलवी
ख़ूबाँ के बीच जानाँ मुम्ताज़ है सरापा
फ़ाएज़ देहलवी
जान-ए-अय्याम-ए-दिलबरी है याद
फ़ाएज़ देहलवी
हर आश्ना से उस बिन बेगाना हो रहा हूँ
फ़ाएज़ देहलवी
गुल तिरे मुख की फ़िक्र में बीमार
फ़ाएज़ देहलवी
एक पल जा न कहूँ नैन सूँ ऐ नूर-ए-बसर
फ़ाएज़ देहलवी
धूप सा यू कपूल नारी है
फ़ाएज़ देहलवी
बे-सबब हम से जुदाई न करो
फ़ाएज़ देहलवी
ऐ सजन वक़्त-ए-जाँ-गुदाज़ी है
फ़ाएज़ देहलवी
ऐ जान शब-ए-हिज्राँ तिरी सख़्त बड़ी है
फ़ाएज़ देहलवी
बिछड़ने वाले ने वक़्त-ए-रुख़्सत कुछ इस नज़र से पलट के देखा
एज़ाज़ अहमद आज़र
तुम ऐसा करना कि कोई जुगनू कोई सितारा सँभाल रखना
एज़ाज़ अहमद आज़र
दरख़्त-ए-जाँ पर अज़ाब-रुत थी न बर्ग जागे न फूल आए
एज़ाज़ अहमद आज़र
ये शहर ये ख़्वाबों का समुंदर न बचेगा
एज़ाज़ अफ़ज़ल
उजाले तेल छिड़कने लगे उजालों पर
एज़ाज़ अफ़ज़ल
सरहद-ए-जल्वा से जो आगे निकल जाएगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
सलीक़ा इतना तो ऐ शौक़-ए-ख़ुश-कलाम आए
एज़ाज़ अफ़ज़ल
रुस्वा भी हुए जाम पटकना भी न आया
एज़ाज़ अफ़ज़ल
निगाह-ए-बाग़बाँ कुछ मेहरबाँ मा'लूम होती है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
नद्दी नद्दी रन पड़ते हैं जब से नाव उतारी है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
ख़्वाबों के सनम-ख़ाने जब ढाए गए होंगे
एज़ाज़ अफ़ज़ल
जाम खनके तो सँभाला न गया दिल तुम से
एज़ाज़ अफ़ज़ल
हम ने मयख़ाने की तक़्दीस बचा ली होती
एज़ाज़ अफ़ज़ल
हर एक गाम पे आसूदगी खड़ी होगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दिलों के बीच बदन की फ़सील उठा दी जाए
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दर्स-ए-आराम मेरे ज़ौक़-ए-सफ़र ने न दिया
एज़ाज़ अफ़ज़ल
चलो कुछ तो राह तय हो न चले तो भूल होगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
ऐ नक़्श-गरो लौह-ए-तहरीर हमें दे दो
एज़ाज़ अफ़ज़ल