Heart Broken Poetry (page 155)
आँगन आँगन ख़ाना-ख़राबी हँसती है मे'मारों पर
एज़ाज़ अफ़ज़ल
आज दिल है कि सर-ए-शाम बुझा लगता है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
उजाले तेल छिड़कने लगे उजालों पर
एज़ाज़ अफ़ज़ल
किस क़दर मसअला-ए-शाम-ओ-सहर बदला है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
जिस्म ही पामाल हो जाए तो सर क्या कीजिए
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दो घड़ी साए में जलने की अज़िय्यत और है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
हिफ़ाज़त
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
बदलते पहलू
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ज़ीस्त में ग़म हैं हम-सफ़र फिर भी
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ख़ुशी की मिली ये सज़ा रफ़्ता रफ़्ता
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
डूबने वाले को तिनके का सहारा है बहुत
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
दर्द इक्सीर के सिवा क्या है
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
दामन तेरा मुझ से छूटा मिलने के हालात नहीं
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
राह-रौ बच के चल दरख़्तों से
एजाज़ वारसी
ऐ संग-ए-आस्ताँ मिरे सज्दों की लाज रख
एजाज़ वारसी
याद उन की दिल में आई वो आसूदगी लिए
एजाज़ वारसी
राह-ए-तलब में अहल-ए-दिल जब हद-ए-आम से बढ़े
एजाज़ वारसी
मय-ख़ाना है बिना-ए-शर-ओ-ख़ैर तो नहीं
एजाज़ वारसी
किसी के शिकवा-हा-ए-जौर से वाक़िफ़ ज़बाँ क्यूँ हो
एजाज़ वारसी
ख़ून-ए-नाहक़ थी फ़क़त दुनिया-ए-आब-ओ-गिल की बात
एजाज़ वारसी
कार-ए-ख़ैर इतना तो ऐ लग़्ज़िश-ए-पा हो जाता
एजाज़ वारसी
कहाँ सबात-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ सराब-ए-सुकूँ
एजाज़ वारसी
जिस को देखो बेवफ़ा है आइनों के शहर में
एजाज़ वारसी
ना-सज़ा आलम-ए-इम्काँ में सज़ा लगता है
एजाज़ सिद्दीक़ी
मिल सकेगी अब भी दाद-ए-आबला-पाई तो क्या
एजाज़ सिद्दीक़ी
शहर-ए-बीना के लोग
एजाज़ रिज़वी
जहाँ पे डूब गया मेरी आस का सूरज
एजाज़ रहमानी
अभी से पाँव के छाले न देखो
एजाज़ रहमानी
ज़ालिम से मुस्तफ़ा का अमल चाहते हैं लोग
एजाज़ रहमानी
उसे ये हक़ है कि वो मुझ से इख़्तिलाफ़ करे
एजाज़ रहमानी