Heart Broken Poetry (page 153)
''ला'' भी है एक गुमाँ
फ़हीम शनास काज़मी
ख़ुद-कुशी के पुल पर
फ़हीम शनास काज़मी
हमारे शजरे बिखर गए हैं
फ़हीम शनास काज़मी
देर हो गई
फ़हीम शनास काज़मी
भगत-सिंह के नाम
फ़हीम शनास काज़मी
बेबसी गीत बुनती रहती है
फ़हीम शनास काज़मी
और ख़ुदा ख़ामोश था
फ़हीम शनास काज़मी
अली-बाबा कोई सिम-सिम
फ़हीम शनास काज़मी
ऐ मुबारज़-तलब
फ़हीम शनास काज़मी
अब तो कुछ भी याद नहीं
फ़हीम शनास काज़मी
आईना देखते हो
फ़हीम शनास काज़मी
आहिस्ता से गुज़रो
फ़हीम शनास काज़मी
ज़मीन पर न रहे आसमाँ को छोड़ दिया
फ़हीम शनास काज़मी
उस ने पूछा भी मगर हाल छुपाए गए हम
फ़हीम शनास काज़मी
समझ रहा था मैं ये दिन गुज़रने वाला नहीं
फ़हीम शनास काज़मी
रस्ते में शाम हो गई क़िस्सा तमाम हो चुका
फ़हीम शनास काज़मी
मैं यूँ जहाँ के ख़्वाब से तन्हा गुज़र गया
फ़हीम शनास काज़मी
हुस्न अल्फ़ाज़ के पैकर में अगर आ सकता
फ़हीम शनास काज़मी
हम एक दिन निकल आए थे ख़्वाब से बाहर
फ़हीम शनास काज़मी
दिल-ए-तबाह को अब तक नहीं यक़ीं आया
फ़हीम शनास काज़मी
दिल ओ निगाह में उस को अगर नहीं रहना
फ़हीम शनास काज़मी
बर्ग-ए-सदा को लब से उड़े देर हो गई
फ़हीम शनास काज़मी
बदन को ख़ाक किया और लहू को आब किया
फ़हीम शनास काज़मी
तुम्हारी याद से ये रात कितनी रौशन है
फ़हीम जोगापुरी
मिलन के ब'अद आती है जुदाई
फ़हीम जोगापुरी
कितने तूफ़ानों से हम उलझे तुझे मालूम क्या
फ़हीम जोगापुरी
शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है
फ़हीम जोगापुरी
दोस्ती में न दुश्मनी में हम
फ़हीम जोगापुरी
वो तमाशा ओ खेल होली का
फ़ाएज़ देहलवी
तुझ बिना दिल को बे-क़रारी है
फ़ाएज़ देहलवी