Heart Broken Poetry (page 150)
हसरत-ए-दीद में गुज़राँ हैं ज़माने कब से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हैराँ है जबीं आज किधर सज्दा रवा है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गिरानी-ए-शब-ए-हिज्राँ दो-चंद क्या करते
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दिल में अब यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
चश्म-ए-मयगूँ ज़रा इधर कर दे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
बे-दम हुए बीमार दवा क्यूँ नहीं देते
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
बात बस से निकल चली है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
अब के बरस दस्तूर-ए-सितम में क्या क्या बाब ईज़ाद हुए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
''आप की याद आती रही रात भर''
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ख़याल-ओ-ख़्वाब को परवाज़ देता रहता हूँ
फ़ैय्याज़ रश्क़
जारी तो हो सब के लिए फ़रमान-ए-मोहब्बत
फ़ैय्याज़ रश्क़
हर क़दम ख़ौफ़ है दहशत है रिया-कारी है
फ़ैय्याज़ रश्क़
उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से
फ़य्याज़ अहमद
कहा फ़लक ने ये उड़ते हुए परिंदों से
फ़ैसल सईद फ़ैसल
हिमाला की दासियाँ
फ़ैसल सईद फ़ैसल
ये तीरा-बख़्त बयानों में क़ैद रहते हैं
फ़ैसल सईद फ़ैसल
क्यूँ आसमान-ए-हिज्र के तारे चले गए
फ़ैसल फेहमी
इश्क़ की आज इंतिहा कर दो
फ़ैसल फेहमी
जिसे कल रात भर पूजा गया था
फ़ैसल अज़ीम
जिसे कल रात भर पूजा गया था
फ़ैसल अज़ीम
रात सितारों वाली थी और धूप भरा था दिन
फ़ैसल अजमी
मैं ज़ख़्म खा के गिरा था कि थाम उस ने लिया
फ़ैसल अजमी
ख़ौफ़ ग़र्क़ाब हो गया 'फ़ैसल'
फ़ैसल अजमी
कभी भुलाया कभी याद कर लिया उस को
फ़ैसल अजमी