Heart Broken Poetry (page 164)
'आज़र' रहा है तेशा मिरे ख़ानदान में
दिलावर अली आज़र
आँख में ख़्वाब ज़माने से अलग रक्खा है
दिलावर अली आज़र
वक़्त-ए-रुख़्सत तसल्लियाँ दे कर
दिल शाहजहाँपुरी
आरज़ू लुत्फ़ तलब इश्क़ सरासर नाकाम
दिल शाहजहाँपुरी
आग़ाज़-ए-मोहब्बत से अंजाम-ए-मोहब्बत तक
दिल शाहजहाँपुरी
फिर ए'तिबार-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा
दिल शाहजहाँपुरी
मायूस-ए-अज़ल हूँ ये माना नाकाम-ए-तमन्ना रहना है
दिल शाहजहाँपुरी
मय-ए-कौसर का असर चश्म-ए-सियह-फ़ाम में है
दिल शाहजहाँपुरी
कूचा-गर्दी में जवानी जाएगी
दिल शाहजहाँपुरी
कूचा-गर्दी में जवानी जाएगी
दिल शाहजहाँपुरी
ऐ इश्क़ तू ने वाक़िफ़-ए-मंज़िल बना दिया
दिल शाहजहाँपुरी
लम्हा लम्हा मुझे वीरान किए देता है
दिल अय्यूबी
रह गया ख़्वाब-ए-दिल-आराम अधूरा किस का
दिल अय्यूबी
मैं सिर्फ़ वो नहीं जो नज़र आ गया तुझे
दिल अय्यूबी
कहाँ मैं अभी तक नज़र आ सका हूँ
दिल अय्यूबी
ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है
धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़
फिर वही शख़्स मिरे ख़्वाब में आया होगा
धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़
मैं इक झूटी कहानी लिख रहा हूँ
धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़
किसी क़लम से किसी की ज़बाँ से चलता हूँ
धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़
आसमाँ खोल दिया पैरों में राहें रख दीं
धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़
उदासी के मंज़र मकानों में हैं
देवमणि पांडेय
महक कलियों की फूलों की हँसी अच्छी नहीं लगती
देवमणि पांडेय
क्या चाहा था क्या सोचा था क्या गुज़री क्या बात हुई
देवमणि पांडेय
कुछ यूँ सफ़र के शौक़ ने मंज़र दिखाए हैं
देवमणि पांडेय
कश्तियाँ मंजधार में हैं नाख़ुदा कोई नहीं
देवमणि पांडेय
कहाँ गई एहसास की ख़ुशबू फ़ना हुए जज़्बात कहाँ
देवमणि पांडेय
इश्क़ के रस्ते चलते चलते हम ऐसे मजबूर हुए
देवमणि पांडेय
इस जहाँ में प्यार महके ज़िंदगी बाक़ी रहे
देवमणि पांडेय
इक क़तरे को दरिया समझा मैं भी कैसा पागल हूँ
देवमणि पांडेय
दिल ने चाहा बहुत और मिला कुछ नहीं
देवमणि पांडेय