Heart Broken Poetry (page 166)
तुझ हिज्र की अगन कूँ बूझाने ऐ संग दिल
दाऊद औरंगाबादी
उस शकर-लब का मैं ख़याली हूँ
दाऊद औरंगाबादी
तेरी अँखियाँ के तसव्वुर में सदा मस्ताना हूँ
दाऊद औरंगाबादी
सीना साफ़ी सूँ मिस्ल-ए-दर्पन कर
दाऊद औरंगाबादी
ख़िर्क़ा-पोशी में ख़ुद-नुमाई है
दाऊद औरंगाबादी
जग है मुश्ताक़ पिव के दर्शन का
दाऊद औरंगाबादी
इश्क़ ने तुझ ख़ाल के मुझ कूँ ख़याली किया
दाऊद औरंगाबादी
हुस्न इस शम्अ-रू का है गुल-रंग
दाऊद औरंगाबादी
फ़रियाद सदा-ए-नफ़स आवाज़-ए-जरस है
दाऊद औरंगाबादी
दिल में ख़याल-ए-यार है जासूस की नमत
दाऊद औरंगाबादी
दर्पन दिया हूँ दिल का मैं उस दिलरुबा के हाथ
दाऊद औरंगाबादी
आतिश-ए-इश्क़ सूँ जो जलता है
दाऊद औरंगाबादी
ज़िंदगी का किस लिए मातम रहे
दत्तात्रिया कैफ़ी
या इलाही मुझ को ये क्या हो गया
दत्तात्रिया कैफ़ी
राहत कहाँ नसीब थी जो अब कहीं नहीं
दत्तात्रिया कैफ़ी
क़िस्मत बुरे किसी के न इस तरह लाए दिन
दत्तात्रिया कैफ़ी
पर्दा-दार हस्ती थी ज़ात के समुंदर में
दत्तात्रिया कैफ़ी
लुत्फ़ हो हश्र में कुछ बात बनाए न बने
दत्तात्रिया कैफ़ी
हुस्न-ए-अज़ल का जल्वा हमारी नज़र में है
दत्तात्रिया कैफ़ी
फ़िदा अल्लाह की ख़िल्क़त पे जिस का जिस्म ओ जाँ होगा
दत्तात्रिया कैफ़ी
ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं
दत्तात्रिया कैफ़ी
सामने जो कहा नहीं होता
दरवेश भारती
ख़ुश-फमी-ए-हुनर ने सँभलने नहीं दिया
दरवेश भारती
जब से किसी से दर्द का रिश्ता नहीं रहा
दरवेश भारती
जब मोहब्बत का किसी शय पे असर हो जाए
दरवेश भारती
दर्द औरों का दिल में गर रखिए
दरवेश भारती
तुम्हारी आँखें
दर्शिका वसानी
पूरा चाँद
दर्शिका वसानी
काश
दर्शिका वसानी
एक और शराबी शाम
दर्शिका वसानी