Heart Broken Poetry (page 168)
अज़िय्यत मुसीबत मलामत बलाएँ
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
समझना फ़हम गर कुछ है तबीई से इलाही को
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मिरा जी है जब तक तिरी जुस्तुजू है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
जग में कोई न टुक हँसा होगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
जग में आ कर इधर उधर देखा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
इश्क़ हर-चंद मिरी जान सदा खाता है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
चमन में सुब्ह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
बाग़-ए-जहाँ के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
संग-ए-बुनियाद
दानियाल तरीर
मैं नफ़ी में
दानियाल तरीर
एक सब आग एक सब पानी
दानियाल तरीर
आवाज़ का नौहा
दानियाल तरीर
उजाला ही उजाला रौशनी ही रौशनी है
दानियाल तरीर
शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता
दानियाल तरीर
रेत मुट्ठी में भरी पानी से आग़ाज़ किया
दानियाल तरीर
रंग और नूर की तमसील से होगा कि नहीं
दानियाल तरीर
पानी के शीशों में रक्खी जाती है
दानियाल तरीर
नई नई सूरतें बदन पर उजालता हूँ
दानियाल तरीर
ख़्वाब जज़ीरा बन सकते थे नहीं बने
दानियाल तरीर
खंडर ये फिर बसाने का इरादा ही नहीं था
दानियाल तरीर
एक बुझाओ एक जलाओ ख़्वाब का क्या है
दानियाल तरीर
चश्म-ए-वा ही न हुई जल्वा-नुमा क्या होता
दानियाल तरीर