Heart Broken Poetry (page 167)

बुढ़ापे की चोटी

दर्शिका वसानी

भूक में दबे बचपन

दर्शिका वसानी

भला ये कौन है मेरे ही अंदर मुझ से रंजिश में

दर्शिका वसानी

ये किस ने कह दिया आख़िर कि छुप-छुपा के पियो

दर्शन सिंह

तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है

दर्शन सिंह

तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन

दर्शन सिंह

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी

दर्शन सिंह

क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात से अहल-ए-जहाँ मफ़र नहीं

दर्शन सिंह

लिबास-ए-फ़क़्र में हम को जो ख़ाकसार मिले

दर्शन सिंह

किसी की शाम-ए-सादगी सहर का रंग पा गई

दर्शन सिंह

कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला

दर्शन सिंह

जज़्बा-ए-दिल को अमल में कभी लाओ तो सही

दर्शन सिंह

इश्क़ शबनम नहीं शरारा है

दर्शन सिंह

इस राह में आते हैं बयाबाँ भी चमन भी

दर्शन सिंह

हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली

दर्शन सिंह

गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

दर्शन सिंह

ग़म-ए-हयात पे ख़ंदाँ हैं तेरे दीवाने

दर्शन सिंह

दौलत मिली जहान की नाम-ओ-निशाँ मिले

दर्शन सिंह

चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं

दर्शन सिंह

बहुत मुश्किल है तर्क-ए-आरज़ू रब्त-आश्ना हो कर

दर्शन सिंह

आज दिल से दुआ करे कोई

दर्शन सिंह

ज़ालिम जफ़ा जो चाहे सो कर मुझ पे तू वले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

टुक ख़बर ले कि हर घड़ी हम को

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

नहीं शिकवा मुझे कुछ बेवफ़ाई का तिरी हरगिज़

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

हो गया मेहमाँ-सरा-ए-कसरत-ए-मौहूम आह

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

हमें तो बाग़ तुझ बिन ख़ाना-ए-मातम नज़र आया

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ग़ाफ़िल ख़ुदा की याद पे मत भूल ज़ीनहार

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दिल भी ऐ 'दर्द' क़तरा-ए-ख़ूँ था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'