Heart Broken Poetry (page 169)

चाँद छूने की तलबगार नहीं हो सकती

दानियाल तरीर

बिला-जवाज़ नहीं है फ़लक से जंग मिरी

दानियाल तरीर

ब-तर्ज़-ए-ख़्वाब सजानी पड़ी है आख़िर-कार

दानियाल तरीर

अजब रंग-ए-तिलस्म-ओ-तर्ज़-ए-नौ है

दानियाल तरीर

आग में जलते हुए देखा गया है

दानियाल तरीर

कहानी एक रात की

दानिश फ़राज़ी

सितम के बा'द भी बाक़ी करम की आस तो है

दानिश फ़राही

शीशे से ज़ियादा नाज़ुक था ये शीशा-ए-दिल जो टूट गया

दानिश फ़राही

न वो ताएरों का जमघट न वो शाख़-ए-आशियाना

दानिश फ़राही

न सोचें अहल-ए-ख़िरद मुझ को आज़माने को

दानिश फ़राही

कुछ अपने दौर की भी कहानी लिखा करो

दानिश फ़राही

किस क़दर इज़्तिराब है यारो

दानिश फ़राही

हश्र इक गुज़रा है वीराने पे घर होने तक

दानिश फ़राही

हो के मजबूर ये बच्चों को सबक़ देना है

दानिश अलीगढ़ी

आख़िरी वक़्त तलक साथ अंधेरों ने दिया

दानिश अलीगढ़ी

ज़िंदगी कर गई तूफ़ाँ के हवाले मुझ को

दानिश अलीगढ़ी

ज़र्रे ज़र्रे में महक प्यार की डाली जाए

दानिश अलीगढ़ी

क्या ख़बर थी मुन्हरिफ़ अहल-ए-जहाँ हो जाएँगे

दानिश अलीगढ़ी

बुलंद ज़ीस्त का अपनी वक़ार हो न सका

दामोदर ठाकुर ज़की

ज़माने के क्या क्या सितम देखते हैं

दाग़ देहलवी

वो ज़माना भी तुम्हें याद है तुम कहते थे

दाग़ देहलवी

वो दिन गए कि 'दाग़' थी हर दम बुतों की याद

दाग़ देहलवी

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

दाग़ देहलवी

उधर शर्म हाइल इधर ख़ौफ़ माने

दाग़ देहलवी

तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता

दाग़ देहलवी

ठोकर भी राह-ए-इश्क़ में खानी ज़रूर है

दाग़ देहलवी

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-उल्फ़त कभी न करना

दाग़ देहलवी

शब-ए-वस्ल की क्या कहूँ दास्ताँ

दाग़ देहलवी

समझो पत्थर की तुम लकीर उसे

दाग़ देहलवी

नासेह ने मेरा हाल जो मुझ से बयाँ किया

दाग़ देहलवी