Heart Broken Poetry (page 171)
तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था
दाग़ देहलवी
तुम आईना ही न हर बार देखते जाओ
दाग़ देहलवी
तेरी सूरत को देखता हूँ मैं
दाग़ देहलवी
तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं
दाग़ देहलवी
सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-उल्फ़त कभी न करना
दाग़ देहलवी
शब-ए-वस्ल ज़िद में बसर हो गई
दाग़ देहलवी
सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
दाग़ देहलवी
क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है
दाग़ देहलवी
पुकारती है ख़मोशी मिरी फ़ुग़ाँ की तरह
दाग़ देहलवी
फिरे राह से वो यहाँ आते आते
दाग़ देहलवी
फिर शब-ए-ग़म ने मुझे शक्ल दिखाई क्यूँकर
दाग़ देहलवी
निगाह-ए-शोख़ जब उस से लड़ी है
दाग़ देहलवी
ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए
दाग़ देहलवी
मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो
दाग़ देहलवी
मुझे ऐ अहल-ए-काबा याद क्या मय-ख़ाना आता है
दाग़ देहलवी
मुझ सा न दे ज़माने को परवरदिगार दिल
दाग़ देहलवी
मोहब्बत में आराम सब चाहते हैं
दाग़ देहलवी
मोहब्बत का असर जाता कहाँ है
दाग़ देहलवी
मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है
दाग़ देहलवी
मज़े इश्क़ के कुछ वही जानते हैं
दाग़ देहलवी
लुत्फ़ वो इश्क़ में पाए हैं कि जी जानता है
दाग़ देहलवी
ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा
दाग़ देहलवी
क्या तर्ज़-ए-कलाम हो गई है
दाग़ देहलवी
खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से
दाग़ देहलवी
कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया
दाग़ देहलवी
काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है
दाग़ देहलवी
जल्वे मिरी निगाह में कौन-ओ-मकाँ के हैं
दाग़ देहलवी
इस क़दर नाज़ है क्यूँ आप को यकताई का
दाग़ देहलवी
इस नहीं का कोई इलाज नहीं
दाग़ देहलवी
इस अदा से वो जफ़ा करते हैं
दाग़ देहलवी