Heart Broken Poetry (page 186)

मिरी दास्तान-ए-अलम तो सुन कोई ज़लज़ला नहीं आएगा

बेदिल हैदरी

हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है

बेदिल हैदरी

दरिया ने कल जो चुप का लिबादा पहन लिया

बेदिल हैदरी

भूक चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे

बेदिल हैदरी

अन-कही को कही बनाना है

बेदिल हैदरी

किरन में फिर से बदलने लगा ख़याल उस का

बेदार सरमदी

बेदम ये मोहब्बत है या कोई मुसीबत है

बेदम शाह वारसी

यूँ गुलशन-ए-हस्ती की माली ने बिना डाली

बेदम शाह वारसी

ये साक़ी की करामत है कि फ़ैज़-ए-मय-परस्ती है

बेदम शाह वारसी

उस को दुनिया और न उक़्बा चाहिए

बेदम शाह वारसी

तेरी उल्फ़त शोबदा-पर्वाज़ है

बेदम शाह वारसी

सीने में दिल है दिल में दाग़ दाग़ में सोज़-ओ-साज़-ए-इश्क़

बेदम शाह वारसी

शादी ओ अलम सब से हासिल है सुबुकदोशी

बेदम शाह वारसी

सहारा मौजों का ले ले के बढ़ रहा हूँ मैं

बेदम शाह वारसी

क़स्र-ए-जानाँ तक रसाई हो किसी तदबीर से

बेदम शाह वारसी

क़फ़स की तीलियों से ले के शाख़-ए-आशियाँ तक है

बेदम शाह वारसी

पास-ए-अदब मुझे उन्हें शर्म-ओ-हया न हो

बेदम शाह वारसी

पर्दे उठे हुए भी हैं उन की इधर नज़र भी है

बेदम शाह वारसी

पहले शर्मा के मार डाला

बेदम शाह वारसी

न तो अपने घर में क़रार है न तिरी गली में क़याम है

बेदम शाह वारसी

न सुनो मेरे नाले हैं दर्द-भरे दार-ओ-असरे आह-ए-सहरे

बेदम शाह वारसी

न मेहराब-ए-हरम समझे न जाने ताक़-ए-बुत-ख़ाना

बेदम शाह वारसी

न कुनिश्त ओ कलीसा से काम हमें दर-ए-दैर न बैत-ए-हरम से ग़रज़

बेदम शाह वारसी

मुझ से छुप कर मिरे अरमानों को बर्बाद न कर

बेदम शाह वारसी

मुझे शिकवा नहीं बर्बाद रख बर्बाद रहने दे

बेदम शाह वारसी

मुझे जल्वों की उस के तमीज़ हो क्या मेरे होश-ओ-हवास बचा ही नहीं

बेदम शाह वारसी

मुबारक साक़ी-ए-मस्ताँ मुबारक

बेदम शाह वारसी

में ग़श में हूँ मुझे इतना नहीं होश

बेदम शाह वारसी

मैं यार का जल्वा हूँ

बेदम शाह वारसी

क्या गिला इस का जो मेरा दिल गया

बेदम शाह वारसी